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500 साल पुराना बिहार का अनोखा कुंआ… इसके पानी के बिना छठ पूजा नहीं करती शेखपुरा की महिलाएं, जानें मान्यता

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Sheikhpura Dal Kuan: शेखपुरा का दाल कुआं शेरशाह सूरी द्वारा 500 साल पहले निर्मित कराया गया था. छठ पूजा के दौरान यह कुंआ आस्था का केंद्र बन जाता है. इस कुएं के मीठे जल से प्रसाद बनता है. जानें कुएं का महत्व…

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शेखपुरा जिले में छठ के दौरान लोग इस कुएं के जल को काफी महत्व देते हैं. दरअसल, शेखपुरा जिला मुख्यालय में स्थित दाल कुआं छठ के दौरान लोगों की एक विशेष आस्था का केंद्र बना जाता है. इस कुएं का इतिहास 500 साल पुराना है. इस कुएं को लेकर उतनी ही पुरानी यहां के लोगों की आस्था है.

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इस कुएं का निर्माण करीब 500 साल पहले अफगान शासक शेरशाह सूरी ने अपने बंगाल यात्रा के दौरान करवाया था. तब से ही छठ व्रती दाल कुआं के पानी से ही छठ के खरना का प्रसाद बनाते हैं. बड़े ही आस्था के साथ हर साल छठ के दिन यहां व्रती की भीड़ जमा हो जाती है.

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खरना वाले दिन सुबह 5 बजे से ही बड़ी संख्या में व्रती और उनके परिजन दाल कुआं पहुंचते हैं. हाथों में दीपक, सिर पर पात्र और दिल में श्रद्धा लिए लोग यहां से पानी ले जाते हैं. कहा जाता है कि दाल कुआं का पानी इतना मीठा और शुद्ध है कि इससे बने प्रसाद में एक अलग ही स्वाद और पवित्रता होती है. यही कारण है कि यह परंपरा वर्षों से बिना किसी बदलाव के आज भी जीवित है.

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दाल कुआं के पीछे एक रोचक कथा भी है. जानकारों के अनुसार, करीब 500 साल पहले जब अफगान शासक शेरशाह सूरी अपने सैनिकों के साथ शेखपुरा से गुजर रहे थे. तब उन्होंने पहाड़ी पर कुछ समय विश्राम किया था. उसी दौरान उन्होंने सैनिकों की मदद से दल्लू चौक से चांदनी चौक तक सड़क निर्माण के लिए पहाड़ को काटकर रास्ता बनाया था. इसी क्षेत्र में उन्होंने खांडपर स्थित राम-जानकी मंदिर के पास दाल कुआं का निर्माण कराया था, जो आज भी उसी स्वरूप में मौजूद है.

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पहाड़ी इलाका होने के कारण उस समय पेयजल की बड़ी समस्या थी. जब इस कुएं से मीठा पानी निकला, तो यह लोगों के लिए वरदान बन गया. धीरे-धीरे इसका पानी दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो गया. बुजुर्ग लखन महतो बताते हैं कि कभी जमींदार अपने सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से बैलगाड़ी पर यह पानी मंगवाते थे. मुंगेर गजेटियर में भी दाल कुएं का जिक्र मिलता है. 1903 में प्रकाशित इस दस्तावेज़ में लिखा गया है कि शेरशाह ने वर्ष 1534 में इस कुएं का निर्माण करवाया था.

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पिछले 500 सालों से शेखपुरा बाजार और आसपास के इलाके में रहने वाले लोग हर साल यहां छठ के दौरान पहुंचते हैं. इस साल भी छठ के दौरान शेखपुरा दाल कुआं को लेकर लोगों की आस्था देखने को मिल रही है. गौरतलब है कि कई इलाकों में गंगाजल या किसी नदी के जल से भी खरना का प्रसाद बनाया जाता है.

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500 साल पुराना बिहार का अनोखा कुंआ… छठ पूजा में है इसका विशेष महत्व

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