Radha-Krishna Intresting Story: मथुरा में एक ऐसा स्थान है, जहां राधा और कृष्ण घूमा करते थे. आज भी इस गांव में राधा-कृष्ण के घूमने के साक्ष्य मौजूद हैं. यमुना किनारे बना यह बगीचा आज भी राधा रानी के उन पलों को याद दिलाता है, जब द्वापर युग में राधा-कृष्ण इस बगीचे में विहार करने आते थे. आज भी राधा-कृष्ण की प्रतिमा इस बगीचे में मौजूद है. यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए आते हैं.
बृज में ही नहीं बल्कि पूरे ब्रह्मांड में राधा का नाम कृष्ण से पहले लिया जाता है. राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं. मथुरा का एक ऐसा स्थान है, जहां राधा और कृष्ण आज भी मौजूद हैं. श्रीकृष्ण की शक्ति राधा का नाम आते ही जन्मस्थली रावल आंखों के सामने आ जाती है. गांव में वह बगीचा है, जिसमें राधाजी विहार करती थीं.
राधा रानी मंदिर के पुजारी ने बताया
यमुना किनारे बसा यह गांव कभी वन, उपवन और फूलों की खुशबू से महकता होगा. आज भी इस बगीचे में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. दर्शन करने के बाद एक अलग ही अनुभूति इस बगीचे में श्रद्धालुओं को होती है. राधा रानी मंदिर के सेवायत पुजारी राहुल से जब Bharat.one की टीम ने बात की तो उन्होंने बताया कि राधा रानी के मंदिर के सामने बगीचा मौजूद है. इस बगीचे में सैकड़ों हरे-भरे वृक्ष मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि यहां दो वृक्ष ऐसे हैं जो आपस में जुड़े हुए हैं. कहा जाता है कि यह दो देह, एक प्राण का वृक्ष है.
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5251 वर्ष पुराने हैं दोनों वृक्ष
यह वृक्ष द्वापर युग से ही यहां खड़े हुए हैं. 5251 साल पुराना इन पेड़ों को बताया जाता है. तब से लेकर आज तक यह वृक्ष जुड़े हुए हैं. राधा-कृष्ण के स्वरूप यह वृक्ष हैं. हर दिन श्रद्धालु बगीचे में पहुंचकर इन वृक्षों का दर्शन करते हैं, जो भी भक्त यहां आता है, उसकी मनोकामना राधा रानी पूरी करती है. कहा जाता है, यह बगीचा राधा रानी के पिता वृषभान का है. राधा रानी इस बगीचे में हर दिन टहलने आया करती थीं.
FIRST PUBLISHED : November 8, 2024, 16:06 IST
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