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Aghori And Naga Sadhu: कोई खाता है कच्चा मांस, तो कोई भीक्षा मांगकर करता है भोजन, जानें अघोरी और नागा साधु में क्या है अंतर?

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सनातन धर्म में अनेक बाबा, साधु और संत होते हैं, सभी का रहन-सहन, जीवन व भक्ति का मार्ग अलग-अलग होता है. लेकिन नागा साधु और अघोरी बाबा ये दोनों साधु अन्य साधुओं से अलग दिखाई देते हैं. हालांकि, जब भी नागा साधु और अघोरी बाबा…और पढ़ें

Aghori And Naga Sadhu: अघोरी और नागा साधु में क्या है अंतर? यहां जानें सबकुछ

कोई खाता है कच्चा मांस, तो कोई भीक्षा मांगकर करता है भोजन, जानें अघोरी और नागा साधु में क्या है अंतर?

Aghori And Naga Sadhu: उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन शुरु हो चुका है और यहां बड़ी संख्या में देश-विदेश हर जगह से श्रृद्धालु पहुंचे हुए हैं. आस्था के इस संगम में पवित्र स्नान व अमृत्तव का आनंद लेने के लिए आम जनता सहित साधु-संतों का भी जमावड़ा है.

लेकिन महाकुंभ में जो आकर्षण का केंद्र है वह नागा साधु और अघोरी साधुओं पर बनी रहती है. क्योंकि इनकी जीवनशैली सबको आश्चर्य में कर देने वाली होती है, जिसके बारे में हर व्यक्ति जानना चाहता है और अघोरी साधु व नागा साधुओं के बीच क्या अंतर होता है, इसके बात के बारे में भी जानना चाहते हैं. तो आइए पंडित रमाकांत मिश्रा से विस्तार से जानते हैं इनसके बारे में कुछ मुख्य बातें.

किसे पूजते हैं अघोरी और नागा साधु?
शिव की आराधना नागा साधुओं और अघोरी बाबाओं को अत्यंत कठिन परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है. साधु बनने के लिए इन्हें लगभग 12 वर्षों की कठोर तपस्या करनी होती है. दोनों ही शिव को पूजते हैं, लेकिन दोनों के आराधना व तपस्या करने का तरीका बेहद अलग-अलग है.

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नागा साधुओं के पूजा करने का तरीका: नागा साधु शिव के परम उपासक होते हैं और ये शैव परंपरा के अनुसार पूजा करते हैं. नागा साधु शिवलिंग पर बेलपत्र, भस्म, जल आदि चीजें चढ़ाते हैं. इनकी पूजा में अग्नि और भस्म का बहुत अधिक महत्व होता है. इसके अलावा नागा साधु भगवान शिव को ध्यान और योग के माध्यम से भक्ति में लीन होने की कोशिश करते हैं.

अघोरी साधुओं के पूजा करने का तरीका: अघोरी साधु का शिव की पूजा करने का तरीका बिलकुल अलग होता है. अघोरी साधु तीन प्रकार की साधना करते हैं, जिसमें शिव, शव और श्मशान साधना शामिल होती है. शव साधना में शिव को मांस, मदिरा का भोग लगाया जाता है और वहीं शिव साधना में शव पर एक पैर पर खड़े होकर साधना की जाती है. शमशान साधना में हवन करना शामिल होता है. अघोरी गुरु भगवान दत्तात्रेय माने जाते हैं. अघोरी साधु शिव को मोक्ष का रास्ता मानते हैं.

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कैसा होता नागा साधुओं और अघोरी साधु का जीवन

नागा साधुओं का जीवन:
नागा परंपरा का गुरु आदिशंकराचार्य को माना जाता है. नागा साधु हमेशा नग्न रहते हैं. इनका कार्य इंसानों और धर्म की रक्षा करना है. बता दें कि नागा साधु बनने की प्रक्रिया 12 सालों की होती है और इनमें से 6 सालों को बहुत अहम माना जाता है. नागा साधु बनने के लिए सबसे पहले ब्रह्मचर्य की शिक्षा दी जाती है, इसके बाद यज्ञोपवीत संस्कार किया जाता है और फिर उससे उसके परिवार और स्वयं का पिंडदान करवाया जाता है.

अघोरी साधुओं का जीवन
वैसे तो अघोरी साधु भी नागा साधु की तरह ही शिव की आराधना करते हैं. लेकिन अघोरी शिव के साथ-साथ मां काली की भी साधना करते हैं. ये लोग कपालिका परंपरा का पालन करते हैं. अघोरी मांस, मदिरा का सेवन और तंत्र-मंत्र करते हैं. अघोरियों के शरीर पर राख लिपटी रहती है और साथ ही रुद्राक्ष की माला और नरमुंड इनके पहनावे का एक हिस्सा होता है. इन्हें सार्वजनिक रुप से महाकुंभ जैसे आयोजनों में ही देखा जा सकता है, क्योंकि ये अधिकतर एकांत में ही रहते हैं. खासतौर पर शमशाम में रहते हैं अघोरी.

क्या खाते हैं नागा साधु और अघोरी बाबा
नागा साधु दिन में सिर्फ एक समय भोजन करते हैं. वह भी भिक्षा मांगकर, इन्हें एक दिन में सिर्फ 7 घरों से भिक्षा मांगने का नियम है. यदि यहां से इन्हें भोजन नहीं मिला तो ये भूखे रहते हैं.

वहीं दूसरी तरफ अघोरी साधु मांस सेवन करते हैं. इतना ही नहीं, जानवरों का कच्चा मांस तक खाते हैं अघोरी. आमतौर अघोरी काले वस्त्र पहनते हैं या कई निर्वस्त्र भी रहते हैं.

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