Arjun vs Karna Mahabharat war: ईरान और इजरायल-अमेरिका के युद्ध में कई आधुनिक हथियारों का प्रयोग किया जा रहा है. आधुनिक मिसाइल और ड्रोन से एक दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं. आज की तकनीक इतनी एडवांस है कि आप दुश्मन के क्षेत्र में जाए बगैर उनके इलाकों को निशाना बनाते हैं. अपने ही क्षेत्र में रहते हुए टारगेट को लॉक कर दिया जाता है और पलक झपकते ही वह मिसाइल या ड्रोन भारी तबाही मचा देता है. वे दिए गए निर्देशों का पालन करता है और सटीक हमला करता है. यह आधुनिक समय का युद्ध है, लेकिन महाभारत का भयानक युद्ध भी कम नहीं था. उसमें भी योद्धा एक दूसरे को क्षति पहुंचाने के लिए अपने धनुष या अन्य हथियारों से टारगेट को लॉक करते थे और उसे एक खास निर्देश देकर छोड़ देते थे, जो उसके अनुसार परिणाम देता था. इसका उदाहरण कर्ण वध के समय देखने को मिलता है.
कर्ण वध के लिए अर्जुन ने दिव्यास्त्र से किया टारगेट लॉक
महाभारत युद्ध में जब अर्जुन और कर्ण का आमना-सामना हुआ तो भीषण लड़ाई हुई. श्राप की वजह से कर्ण के रथ का एक पहिया धरती में धंस गया. कर्ण उस पहिए को निकालने के लिए धरती पर उतरा और रथ को धक्का देने लगा. तभी भगवन श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि कर्ण को मारने का यही सही मौका है. कर्ण उस समय निहत्था था. कर्ण ने अपने निहत्थे होने की बात कही, तब उसे अभिमन्यु वध और उसके किए गए पाप कर्मों की याद दिलाई गई. उसी दौरान अर्जुन ने आंजलिक अस्त्र निकाला और उसे गांडीव पर रखा. सामने लक्ष्य था कर्ण. आज की मिसाइलों में जैसे पहले ही टारगेट को लॉक करते हैं, वैसे ही अर्जुन ने भी अपने धनुष पर आंजलिक अस्त्र रखकर टारेगट को लॉक कर दिया. लेकिन बात इतने से ही नहीं बनने वाली था.
मंत्र से बढ़ाई आंजलिक अस्त्र की ताकत
कर्ण को मारने के लिए अर्जुन ने दिव्यास्त्र चलाया था. (AI)
उस समय में दुश्मनों को मारने के लिए कई प्रकार के अस्त्रों का प्रयोग होता था, लेकिन उनको प्रभाव बनाने के लिए मंत्रों का प्रयोग किया जाता था. बिना उसके वे अस्त्र काम नहीं करते थे. हर व्यक्ति के अंदर दिव्यास्त्र चलाने की योग्यता नहीं होती थी. अर्जुन ने कर्ण को मारने के लिए आंजलिक अस्त्र की ताकत को दिव्यास्त्र मंत्र से बढ़ाया. दिव्यास्त्र मंत्र से अभिमंत्रित करके उस बाण को छोड़ा.
कर्ण वध के लिए अर्जुन ने दिव्यास्त्र से क्या कहा?
महाभारत में लिखा है कि अर्जुन ने उस अप्रमेय शक्तिशाली बाण को धनुष पर रखा और उसे उत्तम एवं महान दिव्यास्त्र से अभिमंत्रित करके तुरंत ही गांडीव खींचते हुए कहा-
यह महान दिव्यास्त्र से प्रेरित महाबाण शत्रु के शरीर, हृदय और प्राणों का विनाश करने वाला है. यदि मैंने तप किय हो, गुरुजनों को सेवा द्वारा संतुष्ट रखा हो, यज्ञ किया हो और हितैषी मित्रों की बातें ध्यान देकर सुनी हो तो इस सत्य के प्रभाव से यह अच्छी तरह संधान किया हुआ बाण मेरे शक्तिशाली शत्रु कर्ण का नाश कर डाले, ऐसा कहकर धनंजय ने उस घोर बाण को कर्ण वध के लिए छोड़ दिया.
अर्जुन का दिव्यास्त्र को निर्देश
कर्ण को मारने वाले दिव्यास्त्र को चलाने से पहले अर्जुन ने कुछ खास बातें कही थीं. (AI)
अर्जुन ने उस दिव्यास्त्र को कर्ण पर लक्ष्य करके खास निर्देश दिया था. अर्जुन ने प्रसन्न होकर बाण को लक्ष्य करके बोला- मेरा यह बाण मुझे विजय दिलाने वाला हो. इसका प्रभाव चंद्रमा और सूर्य के समान है. मेरा छोड़ा हुआ यह घातक अस्त्र कर्ण को यमलोक पहुंचा दे.
दिव्यास्त्र ने कर्ण का सिर धड़ से अलग कर दिया
महाभारत में इस घटना का वर्णन करते हुए लिखा है कि जैसे ही अर्जुन ने अपने गांडीव से उस आंजलिक अस्त्र को छोड़ा, वह सूर्य के समान तेजस्वी बाण आकाश एवं दिशाओं को प्रकाशित करने लगा. जैसे इंद्र ने अपने वज्र से वृत्रासुर का मस्तक काट लिया था, उसी प्रकार अर्जुन ने उस बाण से कर्ण का सिर धड़ से अलग कर दिया.

















