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Ayodhya Holi : एक या दो नहीं, अयोध्या में 45 दिनों तक खेली जाती है होली, भगवान को रंग लगाते हैं संन्यासी, जानें कब से

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Ram temple holi celebration : अयोध्या की होली हमेशा से खास रही है. यहां महीनों तक रंग खेला जाता है. बसंत ऋतु के साथ ही मठ-मंदिरों में होली की धूम शुरू हो जाती है. मंदिरों में भगवान को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है. कहीं फूलों से होली होती है, कहीं रंगों के साथ फगुआ गीत गए जाते हैं. प्रमुख धार्मिक स्थलों राम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन सहित अनेक मठ-मंदिरों में धार्मिक आयोजन होते हैं. साधु-संत, संन्यासी और श्रद्धालु भगवान के साथ होली खेलते हैं.

अयोध्या. राम की नगरी अयोध्या में होली केवल रंगों का एक दिवसीय पर्व नहीं है, बल्कि यह आस्था परंपरा और भक्ति से जुड़ा ऐसा उत्सव है, जो लगभग 40 से 45 दिनों तक लगातार मनाया जाता है. बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही अयोध्या के मठ-मंदिरों में होली की धूम शुरू हो जाती है. जहां भक्त और भगवान के बीच रंगों का अनोखा संगम देखने को मिलता है. बसंत पंचमी के दिन से ही मठों और मंदिरों में भगवान को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है. कहीं फूलों से होली खेली जाती है तो कहीं रंगों के साथ फगुआ गीतों की मधुर धुन वातावरण को भक्तिमय बना देती है. यह परंपरा केवल कुछ दिनों की नहीं, बल्कि पूरे एक महीने से अधिक समय तक चलती है. इस दौरान प्रतिदिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ होली उत्सव मनाया जाता है. अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों राम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन सहित अनेक मठ-मंदिरों में इस मौके पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं. साधु-संत, संन्यासी और श्रद्धालु भगवान के साथ होली खेलते हुए सनातन संस्कृति की इस प्राचीन परंपरा को जीवंत बनाए रखते हैं.

दूसरी जगहों पर भी यही

राम कचहरी चारों धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास बताते हैं कि वसंत ऋतु की शुरुआत होते ही मठ-मंदिरों में होली की धुन सुनाई देने लगती है. बसंत पंचमी से ही भगवान को रंग-गुलाल लगाया जाता है और भक्त लगभग 45 दिनों तक होली का आनंद लेते हैं. यह परंपरा केवल अयोध्या तक सीमित नहीं है, बल्कि मथुरा और काशी जैसे सनातन परंपरा के प्रमुख केंद्रों में भी इसी प्रकार मनाई जाती है.

कितनी पुरानी

महंत शशिकांत दास के अनुसार, यह परंपरा कई सौ वर्षों पुरानी है और इसका संबंध प्रकृति से भी जुड़ा हुआ है. जब खेतों में नई फसल आती है और बसंत ऋतु का आगाज होता है, तभी से भगवान के साथ होली खेलने की परंपरा प्रारंभ होती है. यही कारण है कि होली से कई दिन पहले ही मठ-मंदिरों में रंग और गुलाल दिखाई देने लगता है. अब राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद अयोध्या आने वाले श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के साथ पूरे 45 दिनों तक होली के इस दिव्य और अलौकिक उत्सव का आनंद ले सकेंगे, जो आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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