Last Updated:
संवत में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है, जिसमें चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है. 30 मार्च 2025 से शुरू होने वाले इन नौ दिनों में माता दुर्गा की पूजा से सुख, समृद्धि और जीवन की समस्याओं से मुक्ति मिलती है.
चैत्र नवरात्रि शुरू, घट स्थापना मुहूर्त
ओम प्रयास /हरिद्वार- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एक संवत में चार बार नवरात्रि का आगमन होता है, दो गुप्त और दो प्रकट नवरात्रि. गुप्त नवरात्रि आषाढ़ और पौष मास में होती हैं, जबकि प्रकट नवरात्रि चैत्र और आश्विन मास में मनाए जाते हैं. गुप्त नवरात्रि में देवी की साधना गुप्त रूप से की जाती है, वहीं प्रकट नवरात्रि में धूमधाम से माता रानी के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है.
चैत्र नवरात्रि का महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह नवरात्रि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक होती है. इस अवसर पर देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना से जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है.
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
संवत 2082 की शुरुआत 29 मार्च 2025 को शाम 4:28 बजे होगी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार पहला व्रत 30 मार्च 2025 को रखा जाएगा. घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 30 मार्च को सुबह 6:13 से 10:22 तक रहेगा. नवमी तिथि 7 अप्रैल 2025 को होगी.
पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता
पौराणिक मान्यता है कि चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को ही माता दुर्गा ने ब्रह्मा जी को सृष्टि रचना का कार्य सौंपा था. इसलिए यह दिन सृष्टि, शक्ति और सृजन का प्रतीक है.
सुख-समृद्धि और समस्याओं से मुक्ति का मार्ग
मान्यता है कि इन नौ दिनों में विधिपूर्वक व्रत, पूजा, भजन और स्तोत्र पाठ करने से जीवन की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
विशेष संपर्क
चैत्र नवरात्रि से जुड़ी और अधिक जानकारी के लिए आप हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री से 9557125411 या 9997509443 पर संपर्क कर सकते हैं.
March 18, 2025, 14:44 IST
चैत्र नवरात्रि 2025: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जीवन बदलने वाले रहस्य!

















