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Chandra Grahan Rajasthan: रंगजी, ब्रह्माजी, वराह समेत 500 मंदिरों के कपाट क्यों हो जाएंगे बंद, होली पर पुष्कर गए हैं तो जान लें जरूरी बात

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पुष्कर: ब्रह्माजी, वराह, समेत 500 मंदिरों के कपाट क्यों हो जाएंगे बंद, जानें

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Chandra grahan 2026: क्या आप भी होली सेलिब्रेट करने के लिए राजस्थान के पुष्कर पहुंचे हैं, तो आपको यह सूचना जरूर जाननी चाहिए. पुष्कर में मंगलवार को तमाम मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे. पुजारियों ने बताया कि सूतक काल के चलते मंदिर बंद रखे जाएंगे. दरअसल, मंगलवार को चंद्रग्रहण है जिसके चलते मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे.

पुष्कर: ब्रह्माजी, वराह, समेत 500 मंदिरों के कपाट क्यों हो जाएंगे बंद, जानेंZoom

अजमेर: अगर आप भी होली सेलिब्रेट करने के लिए राजस्थान के पुष्कर पहुंचे हैं तो यह खबर आपके लिए है. मंगलवार को अगर आप पुष्कर प्रसिद्ध मंदिरों में देवी देवताओं के दर्शन करना का मंसूबा पालकर वहां जाएंगे तो आपको मायूस होना पड़ेगा. दरअसल, पुष्कर के प्रसिद्ध ब्रह्मा, वराह, रंगजी समेत 500 मदंरों के कपाट मंगलवार को बंद रहेंगे. ऐसे में देवी-देवताओं के दर्शन को अभिलाषी भक्तों को निराश होना पड़ेगा.

हालांकि इन दिन मंदिरों के कपाट पूरे समय बंद नहीं रहेंगे. पुष्कर के पुजारियों ने बताया कि यहां के तमाम मंदिरों के कपाट शाम में करीब 1 घंटे 24 मिनट के लिए पूरी तरह बंद हो जांएगे. इस दौरान मंदिर में ना तो कोई पूजा होगी और ना ही किसी भक्त को गर्भ गृह के सामने रहने दिया जाएगा.

पुष्कर में है ये प्रसिद्ध मंदिर

पुष्कर को मंदिरों का शहर कहा जाता है. यहां लगभग हर 10 कदम पर एक मंदिर है. पूरे पुष्कर में 500 से ज्यादा मंदिर हैं. हालांकि इनमें कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां तमाम हिंदू जाना चाहते हैं. जो भी भक्त या पर्यटक पुष्कर आते हैं वो वराह, पुराना रंगजी, आप्टेश्वर, ब्रह्माजी, गायत्री, सरस्वती, रघुनाथ, सावित्री, महादेव, श्री राम वैकुंट मंदिर में जाकर जरूर दर्शन करते हैं.

मंगलवार को क्यों बंद रहेंगे पुष्कर के तमाम मंदिरों के कपाट

बता दें कि मंगलवार यानी 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है. खगोलशास्त्रियों का मानना है कि पुष्कर में चंद्र ग्रहण का काल शाम 5.35 PM बजे से 6.59 PM बजे तक रहेगा. इस वजह से तमाम मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे. मान्यता है किसी भी प्रकार के ग्रहण के दौरान राहु और केतु जैसे छद्म ग्रह पूरी तरह से ऐक्टिव हो जाते हैं. इनका प्रभाव अपने चरम पर होता है. वहीं मंदिर और खासकर गर्भगृह पूरी तरह से सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है. ऐसे में ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर लिए जाते हैं. इस दौरान अपवाद छोड़कर किसी भी देवी देवी देवता को किसी प्रकार का भोग या आरती नहीं की जाती है.

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Abhishek Kumar

अभिषेक कुमार Bharat.one की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एड‍िटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें

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