देवघर: छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है. छठ महापर्व में छठी मैया और भगवान भास्कर की पूजा की जाती है. हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले सभी पर्वों में से छठ एकमात्र ऐसा पर्व है, जिसमें प्रत्यक्ष रूप से भगवान भास्कर की पूजा की जाती है. छठ में भगवान भास्कर को ढलते और उगते समय अर्घ्य प्रदान किया जाता है. 7 नवंबर की शाम को व्रती महिलाएं डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी. कई लोग सिर्फ दूध से अर्घ्य देते हैं तो कई लोग दूध मे जल मिलाकर अर्घ्य प्रदान करते हैं. इसमें कौन सी विधि सही है, जानिए देवघर के आचार्य से…
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य नंदकिशोर मुद्गल बताते हैं कि छठ महापर्व मे ढलते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है. अर्घ्य दूध से प्रदान किया जाता है. इसके पीछे धार्मिक कहानी है. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने अपने पुत्र को श्राप दिया था. पुत्र ने काफी विनती की तो श्री हरि ने उसे श्राप मुक्त होने का उपाय बताया. कहा, कुछ दिनों बाद छठ पूजा है, उसमें अगर भगवान भास्कर को दूध से अर्घ्य प्रदान करोगे तो श्राप मुक्त हो जाओगे. उन्होंने वैसा ही किया और वह श्राप मुक्त हो गए. तब से दूध से अर्घ्य देने की परम्परा चली.
किस दूध से दें अर्घ्य?
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि छठ महापर्व मे दूध से अर्घ्य अर्पण किया जाता है. लेकिन, यह दूध उस गाय का होना चाहिए, जिसका बछड़ा हो. जिस गाय का बछड़ा मर गया हो, उस गाय के दूध से अर्घ्य नहीं देना चाहिए. साथ ही भैंस के दूध का भी अर्घ्य अर्पण नहीं करना चाहिए.
पहले दूध फिर पानी से अर्घ्य दें
ज्योतिषाचार्य ने बताया, कई लोग छठ महापर्व में दूध में पानी मिलाकर अर्घ्य देते हैं. कई लोग पहले पानी फिर दूध से अर्घ्य देते हैं, लेकिन ये गलत है. छठ महापर्व में पहले दूध से अर्घ्य देना चाहिए. इसके बाद जल से अर्घ्य देना चाहिए. तभी प्रक्रिया शुभ मानी जाती है.
FIRST PUBLISHED : November 6, 2024, 13:24 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

















