Chitragupta Puja Aarti In Hindi: हमारी परंपराओं में हर देवता का अपना खास स्थान है, और चित्रगुप्त जी का नाम उन देवताओं में आता है जिनका सीधा संबंध हमारे कर्मों से माना जाता है. मान्यता है कि चित्रगुप्त जी हर इंसान के अच्छे-बुरे कामों का हिसाब रखते हैं. इसलिए उनकी पूजा सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अपने जीवन को सही रास्ते पर रखने की याद भी है. खासकर कायस्थ समाज में चित्रगुप्त पूजा का बड़ा महत्व है, लेकिन अब हर वर्ग के लोग इस पूजा को श्रद्धा से करने लगे हैं. दीपावली के बाद आने वाली यम द्वितीया के दिन चित्रगुप्त पूजा की जाती है. इस दिन लोग अपनी लेखनी, किताबें, रजिस्टर, लैपटॉप जैसे काम से जुड़े सामान की पूजा करते हैं. माना जाता है कि इससे बुद्धि साफ रहती है, काम में तरक्की मिलती है और गलत फैसलों से बचाव होता है. पूजा के दौरान आरती का बहुत महत्व है, क्योंकि यही वह पल होता है जब भक्ति अपने पूरे भाव में बाहर आती है.
चित्रगुप्त जी कौन हैं?
पुरानी मान्यताओं के अनुसार चित्रगुप्त जी को ब्रह्मा जी ने बनाया था. उन्हें यमराज के साथ काम सौंपा गया, जहां वे हर आत्मा के कर्मों का लेखा रखते हैं. इंसान धरती पर जो भी करता है, उसका रिकॉर्ड चित्रगुप्त जी के पास माना जाता है. यही कारण है कि उन्हें न्याय और सच्चाई का प्रतीक समझा जाता है.
चित्रगुप्त पूजा का महत्व
यह पूजा हमें अपने काम, सोच और व्यवहार पर ध्यान देने की सीख देती है. लोग मानते हैं कि इस दिन पूजा करने से
– पढ़ाई और दिमाग से जुड़े काम में सफलता मिलती है
– नौकरी और बिज़नेस में रुकावट कम होती है
– गलत फैसले लेने की आदत घटती है
– परिवार में शांति बनी रहती है
यह पूजा खासकर उन लोगों के लिए मानी जाती है जो लिखने-पढ़ने, हिसाब-किताब, कानून, शिक्षा या ऑफिस के काम से जुड़े हैं.
चित्रगुप्त पूजा की आसान विधि
पूजा करना मुश्किल नहीं है. साफ मन और श्रद्धा सबसे ज़रूरी है.
1. सुबह नहा-धोकर साफ कपड़े पहनें.
2. घर के मंदिर या शांत जगह पर चित्रगुप्त जी की तस्वीर या मूर्ति रखें.
3. सामने चौकी पर कपड़ा बिछाकर उस पर पेन, डायरी, किताब या लैपटॉप रखें.
4. दीपक जलाएं, फूल चढ़ाएं और रोली से तिलक लगाएं.
5. मिठाई या फल का भोग रखें.
6. अब हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि आपके काम सही दिशा में चलें.
इसके बाद आरती गाई जाती है, जो पूजा का सबसे खास हिस्सा है.
श्री चित्रगुप्त जी की आरती
ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे.
भक्त जनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी.
भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै.
मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण, प्रभु अन्तर्यामी.
सृष्टि संहारण, जन दु:ख हारण, प्रकट हुये स्वामी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
कलम, दवात, शङ्ख, पत्रिका, कर में अति सोहै.
वैजयन्ती वनमाला, त्रिभुवन मन मोहै॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
सिंहासन का कार्य सम्भाला, ब्रह्मा हर्षाये.
तैंतीस कोटि देवता, चरणन में धाये॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
नृपति सौदास, भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा.
वेगि विलम्ब न लायो, इच्छित फल दीन्हा॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
दारा, सुत, भगिनी, सब अपने स्वास्थ के कर्ता.
जाऊँ कहाँ शरण में किसकी, तुम तज मैं भर्ता॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
बन्धु, पिता तुम स्वामी, शरण गहूँ किसकी.
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
जो जन चित्रगुप्त जी की आरती, प्रेम सहित गावैं.
चौरासी से निश्चित छूटैं, इच्छित फल पावैं॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
न्यायाधीश बैकुण्ठ निवासी, पाप पुण्य लिखते.
हम हैं शरण तिहारी, आस न दूजी करते॥
ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥
आरती गाने का फायदा
आरती सिर्फ शब्द नहीं होती, यह अपने अंदर झांकने का समय भी है. जब हम चित्रगुप्त जी की आरती करते हैं, तो मन में अपने कर्मों को लेकर सजगता आती है. लोग मानते हैं कि इससे सोच साफ होती है, गलत रास्तों से बचने की ताकत मिलती है और जीवन में अनुशासन आता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

















