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Chitrakoot Deepotsav: अयोध्या की तरह यहां भी मनाया जाता है भव्य दीपोत्सव, 5 दिनों तक लाखों दीये जलाते हैं श्रद्धालु

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चित्रकूट: धर्म नगरी चित्रकूट प्रभु श्री राम की तपोस्थली रही है. क्योंकि प्रभु श्री राम ने अपने वनवास काल के लगभग 11 वर्ष यहां पर बिताए थे. ऐसे में दीपावली पर्व को लेकर यहां पांच दिवसीय मेला लगने जा रहा, जिसमें लाखों की तादाद में श्रद्धालु धर्म नगरी चित्रकूट पहुंचते हैं. इसके साथ ही श्रद्धालु मंदाकिनी तट के किनारे दीपदान करते हैं.

अयोध्या की तरह मनाई जाती है दिवाली

बता दें कि दीपावली का त्योहार आयोध्या की तरह खास तरीके से चित्रकूट में भी मनाया जाता है. यहां हर साल धनतेरस से भाई दूज तक पांच दिन का उत्सव मनाया जाता है, जिसमे शामिल होने के लिए देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदाकिनी नदी में दीपदान कर समृद्धि का वरदान मांगते हैं. मान्यता है कि वनवास काल में साढ़े 11 साल चित्रकूट में गुजारने वाले प्रभु श्रीराम अब भी यहां के कण-कण में हैं. लंका विजय के बाद भगवान राम ने ऋषि-मुनियों के साथ मंदाकिनी नदी में दीपदान कर सबका आभार जताया था, फिर अयोध्या गए थे.

महंत ने दी जानकारी

वहीं, भरत मंदिर के महंत दिव्य जीवनदास ने Bharat.one को जानकारी देते हुए बताया कि मान्यता के अनुसार आज भी प्रभु श्रीराम दीपावली को चित्रकूट में मंदाकिनी में दीपदान करते हैं. भगवान राम के साथ दीपदान की कामना लेकर ही श्रद्धालु यहां दूर-दूर से रामघाट के तट में आते हैं. यहां दीपावली के समय लगने वाला पांच दिवसीय दीपदान मेला यहां का सबसे बड़ा मेला माना जाता हैं, जिसमें 25 से 30 लाख श्रद्धालु आते हैं.

उन्होंने बताया कि यहां पर प्रभु सब दिन रहते हैं. ऐसे में मंदाकिनी में दीपदान से उनका सानिध्य मिलता है. इसलिए बड़ी संख्या में दीपदान के लिए श्रद्धालु मेले में आते हैं और रामघाट से लेकर तमाम मठ मंदिरों में दीपदान करते हैं.

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