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dhanbad shyam bhakt bhavesh kumar 1300km khatushyam padyatra

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Dhanbad Shyam Bhakt Padyatra: धनबाद के भूली निवासी भावेश कुमार 8 फीट ऊंचा निशान लेकर झरिया से राजस्थान के खाटूधाम तक 1300 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले हैं. कड़ाके की ठंड और लंबी दूरी के बीच बाबा श्याम के प्रति उनका यह समर्पण आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. पढ़ें, भक्ति और संकल्प की यह अनकही कहानी.

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धनबाद: आस्था जब अटूट हो तो दूरी और थकान गौण हो जाते हैं. कुछ ऐसा ही संकल्प लेकर धनबाद के भूली निवासी भावेश कुमार झरिया के श्री श्याम मंदिर धाम से राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम धाम के लिए पैदल रवाना हुए हैं. 15 जनवरी से शुरू हुई यह पदयात्रा लगभग 1200 से 1300 किलोमीटर की है. जिसे भावेश 40 से 45 दिनों में पूरा करेंगे.

8 फीट ऊंचा ‘निशान’ और अटूट विश्वास
भावेश कुमार हाथ में 8 फीट ऊंचा पवित्र ‘निशान’ लेकर बाबा श्याम के दरबार की ओर बढ़ रहे हैं. यह यात्रा केवल शारीरिक दूरी तय करने का माध्यम नहीं, बल्कि भावेश के लिए एक आत्मिक साधना है. वे अकेले ही इस लंबी यात्रा पर निकले हैं और उनका लक्ष्य 25 फरवरी तक खाटूधाम पहुंचकर बाबा के चरणों में यह निशान अर्पित करना है.

अनुशासन और समर्पण
भावेश प्रतिदिन औसतन 30 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं. वे सुबह 8 बजे अपनी यात्रा शुरू करते हैं और शाम 5 बजे तक निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं. रात में विश्राम के दौरान वे निशान को किसी मंदिर, होटल या श्याम प्रेमी के घर पूरी श्रद्धा के साथ सुरक्षित रखते हैं. भावेश का कहना है कि शारीरिक थकान से ज्यादा बाबा पर मेरा विश्वास और लोगों का प्रेम मुझे आगे बढ़ने की शक्ति देता है.

जगह-जगह हो रहा भव्य स्वागत
वर्तमान में उनकी यात्रा हजारीबाग के बरही प्रखंड अंतर्गत चंपारण क्षेत्र तक पहुंच चुकी है. रास्ते में जहां-जहां से भावेश गुजर रहे हैं, श्याम प्रेमी और स्थानीय लोग जय श्री श्याम के नारों के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं. राहगीर भी इस कठिन तपस्या को देखकर दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं और उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं.

बिन मांगे ही सब मिला, अब बस बाबा का नाम लेना है
भावेश कुमार ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि बाबा श्याम ने मुझे बिन मांगे ही सब कुछ दिया है. अब उनसे कुछ मांगना नहीं है, बस उनकी भक्ति में लीन होकर यह यात्रा पूरी करनी है. अगर इंसान बाबा पर भरोसा कर ले, तो हर नामुमकिन काम मुमकिन हो जाता है.

एक मिसाल बनती पदयात्रा
झरिया से खाटूधाम तक की यह पदयात्रा आज के दौर में श्रद्धा और संकल्प की एक बड़ी मिसाल है. भावेश की यह अटूट भक्ति न केवल श्याम प्रेमियों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन रही है. अगर सब कुछ बाबा की कृपा के अनुसार रहा, तो 25 फरवरी को निशान अर्पण के बाद वे वापस धनबाद लौटेंगे.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और Bharat.one तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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45 दिनों में 1300 KM की पैदल यात्रा! झरिया के श्याम भक्त भावेश की अद्भुत साधना

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