Ekadashi Vrat List in Decemebr 2025: दिसंबर का महीना धार्मिक लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस मास में एक या दो नहीं बल्कि तीन एकादशी तिथियों का व्रत किया जाएगा. हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है और यह तिथि सभी दुख हरने वाली बताई गई है. एकादशी तिथि हर चंद्र पक्ष की 11वीं तिथि है, जिसमे व्रत रखकर भगवान विष्णु की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है. यह तिथि देवताओं की ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है और मनुष्य के शरीर, मन तथा चेतना पर सर्वोत्तम प्रभाव डालती है. पुराणों में मान्यता है कि भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत करके पूजा अर्चना करने से व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है और बैकुंठ धाम की प्राप्ति भी होती है. आइए जानते हैं दिसंबर मास में आखिर तीन एकादशी क्यों हैं…
हजारों यज्ञों के समान पुण्य फल
एकादशी को भगवान विष्णु की विशेष तिथि कहा गया है. शास्त्रों में इसका महत्व इस प्रकार बताया गया है कि यह पापों का नाश करती है, मनुष्य को मोक्षमार्ग की ओर ले जाती है, भक्ति-भाव को बढ़ाती है और मन में सात्त्विकता का संचार होता है. कई पुराणों में वर्णित है कि एकादशी व्रत करके भगवान विष्णु की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करने पर हजारों यज्ञों के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है. एकादशी का दिन पितरों के लिए भी बहुत खास होता है, क्योंकि जिन पितरों को मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है, वे इस दिन एक लोटे में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितृ तर्पण करने से पितरों को मोक्ष धाम की प्राप्ति होती है.

एकादशी व्रत का महत्व
एकादशी का व्रत करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्रतधारी के परिवार को भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है और ग्रह-नक्षत्र के अशुभ प्रभाव में भी कमी आती है. एकादशी की रात्रि को सोना नहीं चाहिए, पूरी रात श्रीहरि की भक्ति करनी चाहिए. एकादशी का व्रत करने से दरिद्रता, दुर्भाग्य और हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-सुविधा, संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. साथ ही एकादशी का व्रत जीवन में शुभता की ओर लेकर जाता है. पुराणों में बताया गया है कि एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति, मोक्ष प्राप्ति, धन-वैभव की प्राप्ति के लिए उत्तम होता है.
दिसंबर मास में क्यों है तीन एकादशी
दिसंबर मास में खरमास भी शुरू हो रहा है, इस अवधि में शुभ व मांगलिक कार्यक्रम पर रोक लग जाती है. खरमास लगभग 30 दिन की अवधि होती है और इस अवधि में जप-तप व दान का विशेष महत्व है. खरमास साल में 2 बार लगता है, पहला मार्च में और दूसरा दिसंबर मास में. पंचांग के अनुसार, खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर से हो रही है और 14 जनवरी 2026 को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खत्म हो जाता है, जिसे मकर संक्रांति कहते हैं. सूर्य देव जब गुरु बृहस्पति देव की राशि धनु या मीन राशि में गोचर करते हैं, तब खरमास लगता है. खरमास की वजह से दिसंबर मास में तीन एकादशी तिथियों का व्रत किया जाएगा.

मोक्षदा एकादशी व्रत 2025
मोक्षदा एकादशी पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का दिन, दिसंबर 2025 की पहली एकादशी मोक्षदा एकादशी है, यह एकादशी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि में आती है.
एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 नवंबर 2025, रात 9 बजकर 29 मिनट से
समापन: 1 दिसंबर 2025, शाम 7 बजकर 1 मिनट तक
व्रत तिथि: 1 दिसंबर 2025 दिन सोमवार
पारण का समय: 02 दिसंबर 2025, सुबह 06:57 बजे से 09:03 बजे तक
मोक्षदा एकादशी को विशेष रूप से पितरों की मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति से जोड़कर देखा जाता है, पुराणों के अनुसार, इस व्रत को रखने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है और मनुष्य के जीवन में बाधाओं का निवारण होता है.
सफला एकादशी व्रत 2025
सफला एकादशी हर कार्य में सफलता दिलाने वाली तिथि, दिसंबर की दूसरी एकादशी सफला एकादशी होगी, जो पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि में आती है.
एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 दिसंबर 2025, शाम 6 बजकर 49 मिनट से
समापन: 15 दिसंबर 2025, रात 9 बजकर 19 मिनट तक
व्रत तिथि: 15 दिसंबर 2025 दिन सोमवार
पारण का समय: 16 दिसंबर 2025, सुबह 07:07 बजे से 09:11 बजे तक
सफला एकादशी का अर्थ है जीवन में सफलता प्राप्त करना, इस दिन व्रत रखने से कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन से निराशा एवं नकारात्मकता दूर होती है, जो व्यक्ति इस दिन उपवास करता है, उसके रुके हुए काम बनते हैं.

पुत्रदा एकादशी व्रत 2025 (खरमास)
पुत्रदा एकादशी संतान इच्छुक दंपतियों के लिए शुभ, दिसंबर की तीसरी एकादशी पुत्रदा एकादशी होगी, जो पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है.
एकादशी तिथि प्रारंभ: 30 दिसंबर 2025, सुबह 7 बजकर 50 मिनट से
समापन: 31 दिसंबर 2025, सुबह 5 बजे बजे
व्रत तिथि: 30 दिसंबर 2025, मंगलवार
पारण का समय: 31 दिसंबर 2025, दोपहर 01:26 बजे से 03:31 बजे तक

















