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Hanuman Jaynti 2025: ये है नीम करौली बाबा की तपोभूमि, जानें नैनीताल के हनुमानगढ़ी मंदिर की अद्भुत कहानी

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Hanuman Jaynti 2025: नैनीताल से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर नैनीताल-हल्द्वानी राजमार्ग पर स्थित यह पवित्र स्थल नीम करौली बाबा की साधना भूमि रहा है. बाबा 1950 में इस स्थल पर आए और यहां अपने अनुयायियों के साथ एक …और पढ़ें

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नैनीताल

नैनीताल में स्थित है नीम करौली बाबा द्वारा स्थापित हनुमानगढ़ी मंदिर

हाइलाइट्स

  • हनुमानगढ़ी मंदिर नीम करौली बाबा की साधना भूमि है.
  • 1953 में बड़े हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई.
  • हनुमानगढ़ी मंदिर आस्था और चमत्कारों का स्थल है.

नैनीताल:  12 अप्रैल को देशभर में हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti 2025) मनाई जाएगी. इस दिन हनुमान मंदिरों में भक्तों की भीड़ रहेगी. हनुमान जयंती के पावन अवसर पर आज हम आपको बाबा नीम करौली के उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर निर्माण की रोचक कहानी बताने जा रहे है. जो ना केवल आस्था से जुड़ी है, बल्कि अनेक दिव्य घटनाओं और चमत्कारों की साक्षी भी रही है. आज भी नैनीताल के कई लोग बाबा के इस मंदिर से जुड़े हुए हैं.

नैनीताल से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर नैनीताल-हल्द्वानी राजमार्ग पर स्थित यह पवित्र स्थल नीम करौली बाबा की साधना भूमि रहा है. बाबा 1950 में इस स्थल पर आए और यहां अपने अनुयायियों के साथ एक छोटी सी कुटिया बनाई. बाद में उन्होंने यहां एक छोटे हनुमान जी की मूर्ति की स्थापना की. 1953 में बड़े हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई. यहीं से हनुमानगढ़ी की आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई. 1955 में राम मंदिर और 1956-57 के बीच शिव मंदिर का निर्माण भी बाबा ने यहीं कराया.

बाबा सबसे पहले आए थे हनुमानगढ़ी

मंदिर के प्रबंधक एमपी सिंह बताते हैं कि हनुमानगढ़ी ही वह पहला स्थान था. जहां नीम करौली बाबा ने अपनी लीला प्रकट की. एक बार ट्रेन रोककर अपनी चमत्कारी शक्ति का प्रमाण देने के बाद वे यहीं पहुंचे थे. यह मंदिर अब भक्तों के लिए एक चमत्कारी और दिव्य स्थल बन चुका है. इस स्थान से एक और महान संत हैड़ाखान बाबा की भविष्यवाणी भी जुड़ी हुई है.

कहा जाता है कि उन्होंने पूर्व में ही यह कह दिया था कि कोई अंजनी का लाल इस भूमि को जागृत करेगा. उस समय यह स्थान एक कब्रिस्तान था, जहां बच्चों को दफनाया जाता था. बाबा ने जब यहां भंडारे का आयोजन किया तो प्रसाद लेने आए कई बच्चे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए. कहा जाता है कि वे वहीं, आत्माएं थीं, जिन्हें बाबा ने मुक्ति दिलाई.

कैसे पहुंचे यहां तक

अगर आप हनुमान जयंती पर इस पवित्र स्थल के दर्शन करना चाहते हैं, तो नैनीताल से हल्द्वानी की ओर किसी भी टैक्सी, कैब या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आसानी से पहुंच सकते हैं. निजी वाहन से यात्रा करना भी आपके लिए बेहद सुविधाजनक हो सकता है. हनुमानगढ़ी सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, चमत्कार और साधना की जीवंत कथा है.

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ये है नीम करौली बाबा की तपोभूमि, जानें हनुमानगढ़ी मंदिर की अद्भुत कहानी

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