
Heart Attack Yoga in Astrology: वर्तमान में हृदयरोग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इन दिनों हृदयरोग एक विकराल सेहत समस्या बनकर उभरा है. आपकी कुंडली में होते हैं कुछ विशेष योग, तब होता है हृदयरोग.दिल की बीमारियों से बचने के लिए हर चिकित्सा पद्धति में खान-पान से लेकर एक्सरसाइज के उपाय बताए गए हैं. योग करने से भी दिल की बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है. वहीं ज्योतिष में भी दिल को दुरुस्त रखने के कई कारगर और असरदार उपाय बताए गए हैं, जिन्हें फॉलो करके आप अपने दिल का हाल बेहतर कर सकते हैं. इस लेख में जानिए क्या हैं ग्रहों के वह संयोग और दिल को दुरुस्त रखने के ज्योतिषीय उपाय.
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- चन्द्रमा यदि शत्रुग्रही हो तो हृदयरोग उत्पन्न होता है. (सारावली, 44.19)
- सूर्य यदि कुम्भ राशिगत हो तो धमनी में अवरोध उत्पन्न करता है. (सारावली, 22.11)
- शुक्र यदि मकर राशिगत हो तो जातक हृदयरोगी होता है. (सारावली)
- षष्ठेश सूर्य यदि चतुर्थ भावगत हो तो जातक हृदयरोगी होता है. (जातकालंकार 2.16)
- लग्नेश निर्बल राहु यदि चतुर्थगत हो तो हृदय रोग होता है. (जा. पारि. 6.19)
- सूर्य यदि चतुर्थ भावगत हो तो हृदयरोग उत्पन्न करता है. (जा. पारि. 8.68)
- चन्द्रमा शत्रुक्षेत्री होने पर हृदयरोग उत्पन्न करता है. (जा. पारि. 8.112)
- तृतीयेश यदि केतु से युक्त हो तो जातक हृदयरोगी होता है. (जा. पारि. 12.36)
- चतुर्थ भाव में पापग्रह हो और चतुर्थेश पापयुक्त हो तो हृदयरोग उत्पन्न करता है. (सर्वार्थचिंतामणि)
- मकर राशिगत सूर्य सामान्य हृदयरोग उत्पन्न करता है. (जा. सारदीप)
- सूर्य वृष राशिगत हो तो जातक हृदयरोग से ग्रस्त होता है. (हो.प्र. 10.44)
- वृश्चिक राशिगत सूर्य हृदयरोग उत्पन्न करता है. (शम्भु हो., 10.46)
- चतुर्थ भावगत षष्ठेश की युति सूर्य-शनि के साथ होने पर हृदयरोग होता है. (जा.भू. 6.11)
- चतुर्थगत यदि शनि, भौम, गुरु हो तो हृदयरोग होता है. (होरारत्न)
- तृतीयेश राहु-केतु से युक्त हो तो हृदयाघात होता है. (ज्यो. र.)
- यदि शनि निर्बल शयनावस्था में हो तो भी हृदयशूल रोग होता है. (ज्यो.र.)
- सूर्य यदि सिंह राशिगत हो तो जातक हृदयरोग से ग्रस्त होता है. (वी.वी. रमन)
- शनि यदि अष्टम भावगत हो तो हृदय रोग उत्पन्न करता है. (गर्ग वचन)
- मकर राशिगत सूर्य हृदयरोग प्रदान करता है. (मू.सू. 3.2.5)
- राहु यदि द्वादशस्थ हो तो हृदय रोग देता है. (भाव. प्र.)
- चतुर्थेश चतुर्थ भावगत पापयुक्त हो तो हृदयरोग देता है. (गदावली 2.33)
- सिंह राशि के द्वितीय द्रेष्काण में यदि जन्म हो तो हृदय रोग होता है. (गदावली 2.24)ज्योतिष में ग्रहों के द्वारा हार्ट अटैक के कारण :
- सूर्य : ज्योतिष के अनुसार, सूर्य पिता और आत्मा का कारक ग्रह होता है. इसकी शुभ-अशुभ स्थितियों के आधार पर हृदय रोग के बारे में भी जानकारी की जा सकती है. बता दें कि सूर्य यदि कुम्भ राशिगत हो, यदि शत्रु राशि में हो, चतुर्थ भाव में हो अथवा पाप पीड़ित हो तो धमनी में अवरोध पैदा करता है.
- चंद्रमा : चंद्रमा मन और मस्तिष्क का कारक होता है, इसलिए खराब चंद्रमा को भी हृदय रोग का कारक माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की जन्मकुंडली में चन्द्रमा यदि शत्रुग्रही है तो हृदयरोग उत्पन्न होने का खतरा बढ़ सकता है.
- शुक्र : ज्योतिष के अनुसार, शुक्र ग्रह भी दिल के रोग का संकेत देता है. ऐसे में जिन लोगों की जन्मकुंडली में शुक्र ग्रह यदि मकर राशि में होता है तो ऐसे जातकों में हृदय रोग होने का खतरा बढ़ सकता है.
- सूर्य, राहु अथवा शनि के साथ : जिन लोगों की कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का राहु-शनि से योग भी हार्ट अटैक देता है.
ज्योतिषशास्त्र में यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह यदि चतुर्थ भाव हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हों तो हृदय रोग हो सकता है. ऐसे लोगों को कई और भी दिक्कतें हो सकती हैं.
ऐसे बहुत से योग हर कुंडली के लिए अलग-अलग हैं परंतु मुख्यत: दिल की बीमारी सूर्य-शनि और दिल का दौरा शनि-मंगल, राहु देते हैं. इनसे समय रहते छुटकारा पाना बेहद जरूरी है.
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हार्ट अटैक से बचने के उपाय : हृदय रोग से बचने के लिए सूर्योदय के समय और सूर्यास्त से पहले हर रोज शंख अवश्य बजाना चाहिए. शंख की आवाज हृदय रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद होती है. बताया जाता है कि हर रोज शंख बजाने से हार्ट अटैक की आशंका कम हो जाती है. साथ ही शंख बजाने का असर शरीर के अन्य भाग पर भी पड़ता है, यह हमारे गुदा और प्रोस्टेट सिस्टम को भी सही रखता है और मांसपेशियां मजबूत करता है.इसके अलावा कुछ ज्योतिष उपाय और हैं जिन्हे करके ग्रहों को बल दिया जा सकता है.
- यदि कुंडली में सूर्य पीड़ित है तो पितृ दोष की शांति एवं सूर्य को मजबूत करने के उपाय करें.
- महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें.
- चंद्रमा के बीज मंत्र ऊँ सोम सोमाय नमः का जाप करें.
- गायत्री मंत्र का नित्य जाप करें, इससे हृदय संबंधित रोगों में कमी आएगी.
FIRST PUBLISHED : December 15, 2024, 15:26 IST

















