Shiv Ji Ko Itra Chadhane Ke Fayde : भगवान शिव को ‘भोलेनाथ’ के नाम से भी जाना जाता है और उन्हें आसानी से प्रसन्न होने वाले देवता माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर जल और बेल पत्र के साथ इत्र (प्राकृतिक परफ्यूम) चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. खुशबू सिर्फ़ सुगंध का ही नहीं, बल्कि आपकी भक्ति और श्रद्धा का भी प्रतीक है. यहां 2026 में आने वाले श्रावण सोमवार को भगवान शिव को इत्र चढ़ाने के 5 मुख्य फायदे बताए गए हैं…
मानसिक शांति और एकाग्रता
भगवान शिव को इत्र अर्पित करने का सबसे बड़ा लाभ मानसिक शांति है. इत्र की सुगंध मन के तनाव को दूर करती है और ध्यान (Meditation) में एकाग्रता बढ़ाती है. अगर आपका मन अशांत रहता है या आप अनिद्रा (Insomnia) से जूझ रहे हैं, तो शिवलिंग पर इत्र चढ़ाना आपके लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है.
शुक्र ग्रह की मजबूती और भौतिक सुख
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इत्र का संबंध शुक्र ग्रह (Venus) से है. शुक्र ग्रह सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और प्रेम का कारक है. जब आप शिवलिंग पर इत्र अर्पित करते हैं, तो आपकी कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है, जिससे आपके जीवन में विलासिता और भौतिक सुख-सुविधाओं की वृद्धि होती है.
वैवाहिक जीवन में मधुरता
इत्र प्रेम और आकर्षण का प्रतीक माना गया है. अगर वैवाहिक जीवन में अनबन रहती है या विवाह में देरी हो रही है, तो सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल में इत्र मिलाकर अभिषेक करना चाहिए. मान्यता है कि इससे रिश्तों में मधुरता आती है और जीवनसाथी के साथ संबंध बेहतर होते हैं.
रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ
पुराणों के अनुसार, भगवान शिव को इत्र अर्पित करने से असाध्य रोगों में लाभ मिलता है. विशेष रूप से चंदन या मोगरा का इत्र शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करता है और स्वास्थ्य में सुधार लाता है. ‘ओम त्र्यंबकम यजामहे…’ मंत्र के साथ इत्र का अर्पण स्वास्थ्य सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.
विचार शुद्धि और मान-सम्मान
नियमित रूप से शिव को इत्र अर्पित करने से व्यक्ति की तामसी प्रवृत्तियां कम होती हैं और विचारों में शुद्धता आती है. समाज में आपका आकर्षण बढ़ता है और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है.
इत्र चढ़ाने की सही विधि:
जल में मिलाकर: शुद्ध जल के लोटे में 2-3 बूंद इत्र डालें और ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करते हुए अभिषेक करें.
सीधे लेपन: थोड़ा सा इत्र अपनी उंगली में लेकर शिवलिंग पर हल्के हाथों से रगड़ें. शिव जी को मोगरा, चंपा और चंदन का इत्र सबसे अधिक प्रिय है.
महाशिवरात्रि 2026 (15 फरवरी) पर शिवलिंग पर इत्र चढ़ाना विशेष रूप से फलदायी माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है.
Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.

















