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Khatushyam Mandir: बर्बरीक से खाटू बाबा बनने की जानें कहानी, कैसे अस्तित्व में आया खाटू श्याम मंदिर?

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Khatushyam Mandir: खाटू श्याम मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि यह वीरता, त्याग और भक्ति का प्रतीक भी है. बर्बरीक की कहानी हमें सिखाती है कि हमें हमेशा अपने वचनों का पालन करना चाहिए और धर्म के मार्ग पर चलना…और पढ़ें

बर्बरीक से खाटू बाबा बनने की कहानी, कैसे अस्तित्व में आया खाटू श्याम मंदिर?

खाटू श्याम कहानी

हाइलाइट्स

  • खाटू श्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है.
  • बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे.
  • भगवान कृष्ण ने बर्बरीक को खाटू श्याम के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया.

Khatushyam Mandir: खाटू श्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है. यह मंदिर भगवान कृष्ण के भक्त बर्बरीक को समर्पित है जिन्हें खाटू श्याम के नाम से भी जाना जाता है. बर्बरीक की कहानी महाभारत काल से जुड़ी है और उनकी वीरता, त्याग और भक्ति की गाथा आज भी भक्तों को प्रेरणा देती है. यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए प्रसिद्ध है और सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

बर्बरीक का जन्म और उनकी वीरता
बर्बरीक भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे. वे बचपन से ही वीर और महान योद्धा थे. उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करके उनसे तीन अभेद्य बाण प्राप्त किए थे जिसके कारण उन्हें तीन बाण धारी भी कहा जाता है. बर्बरीक में अद्भुत साहस और शक्ति थी. वे अपनी माता अहिलावती के प्रति बहुत समर्पित थे.

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महाभारत के युद्ध में बर्बरीक
महाभारत के युद्ध के दौरान बर्बरीक ने अपनी माता से युद्ध में जाने की अनुमति मांगी. उनकी माता ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा कि वे हमेशा हारने वाले का साथ दें. बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया कि वे ऐसा ही करेंगे. जब वे युद्धभूमि की ओर जा रहे थे तो भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण करके उनसे उनका शीश दान में मांगा. दरअसल श्रीकृष्ण युद्ध का अंत जानते थे इसलिए उन्होंने सोचा कि अगर कौरवों को हारता देखकर बर्बरीक कौरवों का साथ देने लगा तो पांडवों का हारना निश्चित है. बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना शीश काटकर भगवान कृष्ण को अर्पित कर दिया.

बर्बरीक का बलिदान और खाटू श्याम के रूप में पुनर्जन्म
बर्बरीक के बलिदान से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें खाटू श्याम के नाम से पूजे जाने का वरदान दिया. उन्होंने कहा कि जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी पूजा करेगा उसकी मनोकामनाएं पूरी होंगी. खाटू श्याम का शीश खाटू नगर में स्थापित किया गया जहां आज भी उनकी पूजा की जाती है.

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खाटू श्याम मंदिर की महिमा
खाटू श्याम मंदिर की महिमा अपरंपार है. यहां आने वाले भक्तों को बाबा श्याम के चमत्कारों का अनुभव होता है. मान्यता है कि खाटू श्याम अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं. यही कारण है कि इस मंदिर में साल भर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

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