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Mahakumbh Kalpwas: महाकुंभ की प्राणशक्ति है कल्पवास, 9 साल की तपस्या के बराबर मिलता है फल, बहुत कठिन हैं नियम

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महाकुंभ में साधु-संतों और आध्यात्मिक लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है. माघ के महीने में हर बार अनेकों साधु-संत और अध्यात्मिक लोग कल्पवास करते हैं. माना जाता है कि कल्पवास के लिए पवित्र नदियों के पास कठिन नियमों का प…और पढ़ें

महाकुंभ की प्राणशक्ति है कल्पवास! 9 साल की तपस्या के बराबर मिलता है फल

महाकुंभ की प्राणशक्ति है कल्पवास! 9 सालों की तपस्या के बराबर मिलता है फल, बहुत कठिन हैं नियम

Mahakumbh Kalpwas 2025: हिन्दुओं के सबसे बड़े आस्था का प्रतीक महाकुंभ इस बार उत्तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज में लगा हुआ है. यहां 13 जनवरी से महाकुंभ में करोड़ों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. दुनिया भर से आए साधु-संतों सहित आम जनता का जमावड़ा यहां लगा हुआ है. बता दें कि महाकुंभ के दौरान काफी बड़ी संख्या में साधु-संत सहित कई लोग यहां तपस्या करते हैं और कई लोग कठिन नियमों का पालन कर कल्पवास करते हैं. माना जाता है कि कल्पवास करने से करीब 9 साल की तपस्या के बराबर फल मिलता है.

महाकुंभ कल्पवास में 91 वर्ष के बुजुर्गों से लेकर ड्यूटी पर तैनात अधिकारी भी हैं. जी हां, कई अधिकारी, आईएएस, आईपीएस भी महाकुंभ में ड्यूटी के दौरान भी कल्पवास कर रहे हैं. माना जाता है कि कल्पवास करने से 9 सालों के तप के बराबर फल मिलता है. कल्पवास करने वाले लोगों का सिर्फ एक निश्चय होता है, वो है आत्मा की शुद्धि और परमात्मा के करीब जाना. लेकिन इसके नियम काफी कठिन होते हैं. तो आइए जानते हैं पंडित रमाकांत मिश्रा के अनुसार कल्पवास के दौरान किन नियमों का किया जाता है पालन.

कैसे किया जाता है कल्पवास
बता दें कि कल्पवास एक ऐसा कठोर तप है, जो कि किसी पवित्र नदी के किनारे 3 रात, 3 माह, 6 माह, 12 साल या आजीवन के लिए तंबू बनाकर किया जाता है. कल्पवास करने वाले साधक इस दौरान संयमित जीवन जीते हैं और पापों का नाश करने के लिए आत्मशुद्धि के लिए कठोर तपस्या करते हैं. पवित्र नदी में स्नान करते हैं, ध्यान-धर्म करते हैं और ईश्वर की उपासना करते हैं. कहा जाता है कि अगर एक बार बिन कुछ खाए-पिए कल्पवास किया जाए तो उसे 9 साल तपस्या करने के समान फल मिलता है.

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कल्पवास में इन नियमों का करना पड़ता है पालन
कल्पवास के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना होता है. इन नियमों का पालन करना बेहद जरुरी होता है, क्योंकि माना जाता है कि अगर नियमों का पालन ना किया जाए तो तपस्या भंग मानी जाती है. ये रहे कल्पवासियों के नियम

– कल्पवास करने वाले जातकों को ब्रह्म मुहूर्त में उठना होता है और प्रतिदिन 3 बार नदी में स्नान और जप करना होता है.

– कल्पवास के दौरान व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है. साथ ही हर प्रकार के व्यसनों को त्यागकर जीवन जीना पड़ता है.

– कल्पवास के दौरान साधक को झूठ नहीं बोलना होता है.

– कल्सवासियों को खुद पर संयम रखना चाहिए, क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए.

– कल्पवास के दौरान किसी भी प्राणी को नुकसान पहुंचाने से बचें और सभी पर दयाभाव रखनी पड़ती है.

– कल्पवास के दौरान जातक को एक बार ही भोजन करना होता है, इसके साथ ही जमीन पर सोना पड़ता है.

– कल्पवास के दौरान जातक को हर प्रकार की निंदा से दूर रहना चाहिए. व संकल्पित क्षेत्र से बाहर नहीं जाना चाहिए.

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