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Mahashivratri 2026: शिवरात्रि डेट कन्फ्यूजन खत्म! जानें रुद्राभिषेक का समय और भद्रा-पंचक स्थिति

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देवघर: देवों के देव महादेव को समर्पित महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है. यह पर्व शिवभक्तों के लिए विशेष आस्था, साधना और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है. लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जिसका महत्व सबसे अधिक होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन रात्रि में भगवान शिव शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे.

शिवलिंग को सृष्टि का प्रतीक माना जाता है.कहा जाता है कि मन, चित्त, बुद्धि, जीव, माया, ब्रह्म, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी इन सभी तत्वों के समन्वय से शिवलिंग की रचना हुई है.यही कारण है कि महाशिवरात्रि की रात्रि में की गई शिव साधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.एक पौराणिक कथा यह भी कहती है की इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भी सम्पन हुआ था. इसलिए इस दिन सभी शिवालय से शिव बारात भी निकाली जाती है.

कब है महाशिवरात्रि 2026?
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल बताते है की ऋषिकेश पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी 2026 को शाम 05:04 बजे होगा और इसका समापन 16 फरवरी 2026 को शाम 05:34 बजे होगा.सामान्यतः हिंदू त्योहार उदयातिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि का निर्णय निशिता काल में चतुर्दशी तिथि की उपस्थिति के आधार पर किया जाता है. चूंकि 15 फरवरी की रात्रि में निशिता काल के दौरान चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026, रविवार को ही मनाया जाएगा.

इस साल रहेगा भद्रा का साया:
ज्योतिषाचार्य बताते है की इस साल महाशिवरात्रि के दिन भद्रा का साया रहने वाला है. भद्राकाल मे कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए.भद्राकाल की शुरुवात 15 फरवरी शाम लगभग 5 बजकर 04 मिनट मे हो रहा है और समाप्त अगले दिन 16 फरवरी सुबह लगभग 5बजकर 23 मिनट मे हो रहा है.

महाशिवरात्रि के दिन बन रहा है विशेष संयोग:
इस बार महाशिवरात्रि पर एक विशेष शुभ संयोग भी बन रहा है.15 फरवरी 2026 को रात 7 बजकर 48 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र आरंभ हो जाएगा. शास्त्रों में श्रवण नक्षत्र को शिव पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ और साधना के लिए श्रेष्ठ योग माना जाता है.ऐसी मान्यता है कि इस शुभ योग में संध्या समय भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है. अतः महाशिवरात्रि 2026 शिवभक्तों के लिए एक अत्यंत शुभ और फलदायी अवसर लेकर आ रही है.

विवाह के लिए करे खास उपाय :
कई जातक ऐसे होते हैं जिनके विवाह में समस्याएं उत्पन्न होने लगते हैं. वैसे जातक महाशिवरात्रि के दिन अगर भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती को हल्दी अर्पण करें तो उनकी यह समस्याएं समाप्त हो जाएगी और जल्द उनका शादी विवाह में संपन्न होगा.

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