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mana-gaon-saraswati-river-secret-bheem-shila-pandav-connection mahabharat-badrinath, जब नदी ने रोका था पांडवों का रास्ता, महाबलि भीम ने निकाला तोड़! ऋषिकेश की गुप्‍त सरस्‍वती की अनोखी कहानी

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Rishikesh News: सरस्वती नदी का दृश्य रूप माणा गांव में देखने को मिलता है. यह गांव बद्रीनाथ धाम से ठीक कुछ किलोमीटर पहले भारत-तिब्बत सीमा के पास बसा है और इसे भारत का प्रथम गांव भी कहा जाता है. महाभारत से भी यहां का इतिहास जुड़ा हुआ है.

ऋषिकेश: भारत की पावन धरती रहस्यों, चमत्कारों और अनगिनत आध्यात्मिक कथाओं का केंद्र रही है. यहां हर पर्वत, नदी और घाट अपने भीतर इतिहास की परतें समेटे हुए है. ऐसी ही एक अनोखी और आस्था से भरी नदी है सरस्वती, जिसकी धारा उत्तराखंड के माणा गांव में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती है. कुछ दूरी बाद यह नदी भूमिगत धारा के रूप में प्रवाहित हो जाती है. ऐसा माना जाता है कि यह गुप्त रूप में ऋषिकेश, हरिद्वार और प्रयागराज तक बहती है और वहीं गंगा और यमुना से संगम स्थान पर मिलती है.

ये है भारत का प्रथम गांव

Bharat.one के साथ बातचीत के दौरान महंत रामेश्वर गिरी ने कहा कि सरस्वती नदी का दृश्य रूप माणा गांव में देखने को मिलता है. यह गांव बद्रीनाथ धाम से ठीक कुछ किलोमीटर पहले भारत-तिब्बत सीमा के पास बसा है और इसे भारत का प्रथम गांव भी कहा जाता है. यहां संकरी पहाड़ी चट्टानों के बीच सरस्वती नदी का तेज प्रवाह दिखाई देता है.

जल का प्रचंड वेग और उसकी गरजती आवाज किसी भी यात्री को रोमांच और आध्यात्मिक अनुभूति से भर देती है. इस स्थान से कुछ दूरी आगे नदी चट्टानों के भीतर विलुप्त हो जाती है और भूमिगत प्रवाह में बदल जाती है. यही वह अद्भुत रहस्य है, जिसने सदियों से यात्रियों, संतों और शोधकर्ताओं को आकर्षित किया है.

महाभारत काल से जुड़ा इतिहास

सरस्वती नदी का संबंध महाभारत काल और पांडवों से भी जुड़ा हुआ है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव स्वर्गारोहण की यात्रा पर निकले थे. जब वे माणा क्षेत्र में पहुंचे तो नदी का प्रवाह इतना तीव्र था कि उसे पार करना लगभग असंभव था. उसी समय भीम ने एक विशाल चट्टान उठाकर नदी पर रख दी, जिससे नदी पार करने का मार्ग बन गया. इस चट्टान को आज भी भीम शिला के नाम से जाना जाता है और यह स्थान अत्यधिक श्रद्धा और ऐतिहासिक महत्व रखता है.

कथाओं के अनुसार, सरस्वती माता पांडवों से युद्ध करने के कारण रुष्ट थीं और नदी के प्रचंड रूप को इसी क्रोध का प्रतीक माना गया. जब भीम ने मार्ग बनाया तो माता सरस्वती को लज्जा आई और वे भूमिगत प्रवाह में परिवर्तित हो गईं. यही वजह है कि सरस्वती का दृश्य रूप केवल माणा क्षेत्र में ही मिलता है, लेकिन उनकी धारा हमेशा सक्रिय मानी जाती है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Bharat.one से जुड़ गए.

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जब नदी ने रोका था पांडवों का रास्ता, महाबली भीम ने निकाला तोड़! रहस्यमय कहानी

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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