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Shab-E-Barat (Mid-Sha’ban) : शब-ए-बारात को मगफिरत की रात कहा जाता है, जो इस्लामिक कैलेंडर के समान महीने की 14वीं रात को मनाई जाती है. इस रात मस्जिदों में नमाज अदा कर गुनाहों की माफी मांगी जाती है और पूर्वजों की…और पढ़ें
शब-ए-बारात को मगफिरत यानी माफी की रात भी कहते हैं.
हाइलाइट्स
- शब-ए-बारात को मगफिरत की रात कहा जाता है.
- इस रात मस्जिदों में नमाज अदा कर माफी मांगी जाती है.
- इस्लामिक कैलेंडर के समान महीने की 14वीं रात को मनाया जाता है.
Shab-E-Barat (Mid-Sha’ban) : शब-ए-बारात का त्योहार मगफिरत की रात भी कहा जाता है. कहीं-कहीं इस सुबरात भी कहते हैं. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार इसको समान महीने की 14 वीं तारीख की रात को मनाया जाता है. फारसी भाषा में शब का अर्थ रात और बारात का अर्थ बड़ी होना माना जाता है इसलिए इसे मगफिरत यानी माफी की रात भी कहते हैं. सुबरात में मस्जिदों में रात्रि कल में नमाज अदा करने की और अपने गुनाहों की माफी मांगने की रिवाज है. आई विस्तार से सुबरात के त्यौहार के बारे में समझते हैं.
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सुबरात का महत्व : सुबरात के दिन रात्रि काल में मस्जिदों में नमाज अता करके अपने गुनाहों की अल्लाह से माफी मांगी जाती है. इसके अलावा अपने पूर्वजों की कब्र के पास जाकर उनकी मगफिरत की दुआ मांगते हैं. सुबरात में दान करने का विशेष महत्व होता है. इस रात को तकदीर बदलने वाली रात भी कहा जाता है. अल्लाह के बंदों में इस दिन विशेष उत्साह देखने को मिलता है. मान्यता है इस दिन इबादत करने से पूरी होती है. सब शुभ रात की लिए मस्जिदों में विशेष इंतजामात किए जाते हैं, और एक विशेष प्रकार का नजारा देखने को मिलता है.
सुबरात मनाने का कारण : इस्लाम में कहा जाता है कि इस रात को की जाने वाली हर जायज दुआ को अल्लाह जरूर कबूल करते हैं. इस रात अल्लाह की रहमत सबको मिलती है. इसलिए इस्लाम को मानने वाले मुस्लिम समाज के लोग रात भर जगा कर इबादत करते हैं एवं कुरान और नमाज पढ़ते हैं.
लोग रखते हैं रोजा : इस दिन रोजा रखना कुरान में फर्ज या अनिवार्य नहीं माना गया है लेकिन सुबरात पर रोजा रखने से पिछले शुभ रात तक के जो भी गुना जाने अनजाने में हमारे द्वारा किए जाते हैं. उन सब की माफी आज के दिन अल्लाह से हमें मिल जाती है.
सुबरात का अलग अलग मत : सुन्नी मुसलमान का मानना है कि इस दिन अल्लाह के नूर से संदूक को बाढ़ से बचाया गया था. वही शिया मुसलमान का मानना है कि 12वें इमाम मोहम्मद अल मेहंदी की पैदाइश 15 शाबान को हुई थी. इसलिए सुबरात का त्यौहार मनाया जाता है. हालांकि कुरान में किसी भी आयात में शब-ए-बारात या मध्य शाबान रात का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है.
February 13, 2025, 18:13 IST
शब-ए-बारात: मगफिरत की रात, दुआओं और इबादत का महत्व

















