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Khan sir Jagannath Puri story: ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ पुरी मंदिर दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यह से जुड़ी कई धार्मिक परंपराओं में इतना रहस्य है कि इसे विज्ञान भी साबित करने में असफल रहा है. पटना के मशहूर शिक्षक खान सर ने जगन्नाथ मंदिर में महाप्रसाद के रहस्यों की अद्भुत व्याख्या की है जिसके बारे में आपको शायद ही पता हो. आइए जानते हैं क्या है यह रहस्य.
Jagannath Puri secret by Khan Sir: भगवान जगन्नाथ मंदिर भगवान जगन्नाथ (विष्णु) बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित मंदिर है. यह मंदिर ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में स्थित है. भगवान जगन्नाथ मंदिर अपनी स्थापत्य और वास्तुकला के लिए तो प्रसिद्ध है ही, यह रहस्यों से भरी हुई दुनिया की एक साक्षात नगरी है. भगवान जगन्नाथ मंदिर के ऐसे-ऐसे अद्भुत रहस्य हैं कि आप इसे सुनकर ही हैरान हो जाएंगे. पटना के मशहूर शिक्षक खान सर ने अपने क्लास में बच्चों को पढ़ाते हुए इसके एक रहस्य के बारे में बताया है. खान सर ने जगन्नाथ पुरी मंदिर में बनने वाले महाप्रसाद के रहस्य के बारे में बताया है.
खान सर ने क्या कहा
खान सर अपने बच्चों को पढ़ाते हुए बताया कि जगन्नाथ पुरी मंदिर में कई रहस्य हैं जिनमें से एक है वहां का महाप्रसाद है. खान सर ने बताया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालु आते हैं और उन्हें भगवान का चढ़ाया हुआ महाप्रसाद मिलता है. इस महाप्रसाद को बनाने की कथा अनूठी है. खान सर कहते हैं कि यह महाप्रसाद मिट्टी के बर्तन में बनता है. इसके लिए मिट्टी के सात बर्तन लिए जाते हैं और एक पर एक करके सातों बर्तनों को एक ही चूल्हें पर रख दिए जाते हैं. यानी चूल्हे के उपर मिट्टी के एक बर्तन और उस बर्तन के उपर दूसरा फिर तीसरा फिर चौथा फिर पांचवां फिर छठा और आखिर में सांतवां बर्तन भी इसी पर रखा जाता है. सारे बर्तनों में समान मात्रा में कई चीजों की खिचड़ी बनाई जाती है. इनमें कद्दू और चावल की प्रमुखता होती है. जब यह खिचड़ी पकती है तो इसमें रहस्यों का अद्भुत बात सामने आती है. आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि चूल्हे पर जो सात बर्तन रखे होते हैं, उनमें सबसे उपर जो बर्तन होता है खिचड़ी सबसे पहले वहां पकती है. इसके बाद छठे बर्तन में खिचड़ी पकती है फिर पांचवें फिर चौथे फिर तीसरे फिर दूसरे और आखिर में पहले बर्तन वाली खिचड़ी पकती है. इस रहस्य का पता आज तक विज्ञान भी नहीं लगा सका है.
महाप्रसाद की विशेषता
जगन्नाथ मंदिर में हर रोज़ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और सुभद्रा को भोग लगाने के लिए अनेकों पकवान बनते हैं. जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोइयों में से एक है.यहां हजारों लोग हर रोज भोजन करते हैं. लेकिन आज तक किसी भी श्रद्धालु के लिए खिचड़ी की कमी नहीं हुई है. कभी किसी के लिए भोग कम नहीं पड़ता. मंदिर में 750 लकड़ी के चूल्हे हैं. रसोई में लगभग 600–700 महाराणा जिसे सेवायत रसोइए कहा जाता है, परंपरागत तरीके से प्रसाद बनाते हैं. आज तक यहां कोई भी आधुनिक मशीन या गैस का प्रयोग नहीं किया जाता है. खाना मिट्टी के बर्तनों में ही पकाया जाता है. इन्हें केवल एक बार उपयोग किया जाता है. बर्तन बांस के डंडों से चूल्हे पर व्यवस्थित किए जाते हैं.
महाप्रसाद में क्या-क्या होता है
जगन्नाथ पुरी के महाप्रसाद में कई चीजों को मिलाई जाती है. अन्न यानी चावल, दाल, बेसर, मेहुरा, साग, खट्टा, पिठा, कनिका, घी आदि से महाप्रसाद बनाया जाता है. सबसे पहले सुबह भगवान को चढ़ाने के लिए हल्का भोजन तैयार किया जाता है. इसमें बिना मसाले के उबला चावल, दाल और सब्जियां होती हैं. मुख्य भोजन दोपहर में बनाया जाता है. यह सबसे बड़ा और मुख्य महाप्रसाद है. इसमें 56 भोजन यानी छप्पन भोग के साथ मुख्य 12 चीजों का अभद तैयार होता है. घी, हल्दी, नमक और देसी मसालों का प्रयोग होता है लेकिन प्याज, लहसुन या अन्य तामसिक मसाले नहीं होते है. केवल सेवायत ब्राह्मण रसोइए (सूरा महापात्र, महराना) ही रसोई में प्रवेश कर सकते हैं. खाना पकने के दौरान कोई आवाज, किसी अन्य की छाया या बाहरी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है. रसोई में केवल आम और पीपल की लकड़ी जलाई जाती है. महाप्रसाद पकाने के बाद सबसे पहले भगवान बलभद्र, सुभद्रा और जगन्नाथ को निवेदित किया जाता है. फिर इसे मंदिर प्रांगण में उपस्थित भक्तों के लिए अनंद बाजार में वितरित किया जाता है. महाप्रसाद को छूने वाला हर व्यक्ति पवित्र माना जाता है यहां जाति भेद मिट जाता है.
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