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Pitru Paksha 2024: पितृ पक्ष में जरूर करें तुलसी का उपयोग, खत्म हो जाएगा सारा दोष

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हरिद्वार. पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण का विशेष महत्व है. पितृपक्ष में पितरों की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. पितृपक्ष में पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म के कार्य किए जाते हैं. वैदिक पंचांग के भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से आश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष रहता है. पितृ पक्ष 17 सितंबर से शुरू हो रहा है . इसका समापन 2 अक्टूबर को होगा. इस दौरान पितरों और पूर्वजों के निमित्त उनके श्राद्ध के दिन विधि विधान से उनका श्राद्ध कर्म, पिंडदान, तर्पण, कर्मकांड आदि किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से उन्हें शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. ज्योतिष के अनुसार पितरों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध कर्म को पवित्रता और शुद्धता के साथ किया जाता है.

धार्मिक ग्रंथों जैसे वेद, पुराण, उपनिषद में तुलसी को सबसे अधिक पवित्र बताया गया है. तुलसी दल का प्रयोग अधिकतर आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों और क्रियाओं में पवित्रता बनाए रखने के लिए किया जाता हैं. वहीं श्राद्ध पक्ष के दिनों में पितरों के लिए भोजन, ग्रास और पूजा पाठ आदि में पवित्रता बनाए रखने के लिए तुलसी दल का प्रयोग किया जाता है. श्राद्ध कर्म, तर्पण, कर्मकांड, पिंडदान आदि को पितरों के निमित्त करने में तुलसी का प्रयोग करने से उसमें पवित्रता आने के साथ-साथ दोष भी समाप्त हो जाता है जिससे श्राद्ध का संपूर्ण फल मिलता है.

क्यों मिलाया जाता है तुलसी दल?
हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री ने Bharat.one को बताया कि सनातन धर्म में तुलसी को बहुत अधिक पवित्र माना गया है. श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त बनने वाले भोजन, ग्रास या पूजा-पाठ के कार्यों में पवित्रता और उसमें होने वाले दोष को समाप्त करने के लिए तुलसी को मिलाया जाता है. तुलसी को भोजन में मिलने से उसमें पवित्रता आती है और पूजा-पाठ के कार्यों में तुलसी का इस्तेमाल करने से हर प्रकार का दोष खत्म हो जाता है जिससे श्राद्ध का संपूर्ण फल प्राप्त होता है. हिंदू धर्म में तुलसी का प्रयोग करने से दोष समाप्त हो जाता है और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होने के साथ उन्हें परमधाम में स्थान मिलता हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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