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Prasad Vivad: देश के मंदिरों में लागू हो नई प्रसाद व्यवस्था, काशी विद्वत परिषद ने की पहल, जानें क्या है विकल्प

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वाराणसी: तिरुपति बालाजी के लड्डू प्रसादम में मिलावट पर घमासान मचा हुआ है. इस घमासान के बीच अब देश के मंदिरों में नई प्रसाद व्यवस्था को लागू करने की कवायत तेज हो गई है. काशी विद्वत परिषद ने इसके लिए पहल की है. बकायदा इस मुद्दे को लेकर काशी विद्वत परिषद ने अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती के साथ बैठक कर इसपर विस्तृत चर्चा भी की है.

वहीं, जल्द ही इस मुद्दे को लेकर काशी विद्वत परिषद और अखिल भारतीय संत समिति देश के सभी बड़े मंदिरों के प्रबंधक और व्यवस्थापकों के साथ इसको लेकर बैठक करेगी. इस बैठक के बाद इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए इस निर्णय को सरकार से भी अवगत कराया जाएगा.

काशी विद्वत परिषद के महामंत्री ने बताया
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि प्रसाद में मिलावट न हो और प्रसाद की शुद्धता और सुचिता बनी रहे. इसके लिए मंदिरों में पंचमेवा, बताशा, रामदाने से बना सामान देवालयों में राजभोग के तौर पर लगाया जाए, जिसमें मिलावट की कोई संभावना न हो.

करें गौशाला का निर्माण
इसके अलावा देश के बड़े मंदिर जहां अच्छा चढ़ावा आता हो. उन मंदिरों के पास गौशाला का निर्माण करके गौ माता का सेवन करना चाहिए और उनके दूध से निर्मित चीजों से प्रसाद बनाकर भक्तों में वितरण करना चाहिए. जिससे गौसंरक्षण के साथ सनातन धर्म का उत्थान हो सकें.

पाप का करें प्रायश्चित
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि जिन लोगों ने तिरुपति बालाजी का मिलावटी लड्डू प्रसाद खाया है. उन्हें प्रायश्चित के तौर पर अपना शुद्धिकरण जरूर कराना चाहिए. सनातन धर्म में इसके लिए पंचगव्य अन्नप्राशन की व्यवस्था है.

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