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Putrada Ekadashi 2025 Date : निसंतानों या पुत्र रत्न की चाहत रखने वाले इस दिन का पूरे साल इंतजार करते हैं, लेकिन इस बार तिथि को लेकर भ्रम पैदा हो गया है. साल 2025 में पौष मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि घट रही है. इस कारण लोगों के मन में इस व्रत को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए Bharat.one ने हरिद्वार के पंडित श्रीराम शास्त्री से बात कर सही तिथि और इस व्रत के सभी फायदों के बारे में पूछा.
Putrada Ekadashi 2025 Kab Hai/हरिद्वार. हिंदू पंचांग के अनुसार साल में कुल 24 एकादशियों का आगमन होता है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित और सबसे अधिक प्रिय होती है. पौष मास शुक्ल पक्ष में होने वाली एकादशी तिथि विशेष फल प्रदान करने वाली बताई गई है. जो दंपत्ति पुत्र प्राप्ति के अनेक उपाय करके थक चुके हैं उनके द्वारा यदि इस मास की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के एक खास मंत्र का पाठ विधि अनुसार किया जाए तो पुत्र प्राप्ति हो जाती है. साल 2025 में पौष मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि घट रही है जिस कारण लोगों के मन में इस व्रत को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. ये व्रत कब पड़ रहा है, इसका लाभ कैसे मिलेगा, आइये जानते हैं.
एकादशी तिथि के कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए Bharat.one ने हरिद्वार के विद्वान धर्माचार्य पंडित श्रीराम शास्त्री से बात की. पंडित श्रीराम शास्त्री ने बताया कि साल 2025 में पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि घट रही है, जिसको लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है. पंचांग के अनुसार पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का घट रही है जिस कारण पुत्रदा एकादशी का व्रत दशमी तिथि यानी 30 दिसंबर की सुबह 7: 51 से शुरू हो जाएगा. 30 दिसंबर को पारिवारिक जीवन जीने वाले लोग इस व्रत को करके भगवान विष्णु का संपूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. 1 जनवरी 2026 की तड़के 1:47 पर एकादशी व्रत का समापन हो जाएगा. 31 दिसंबर यानी साल के आखिरी दिन यह खास व्रत वैष्णव संप्रदाय के साधु संतों द्वारा किया जाएगा.
उत्तरदाई एकादशी
पंडित श्रीराम शास्त्री के मुताबिक, संयोग से पुत्रदा एकादशी का व्रत दो दिनों तक किया जाएगा. यदि किसी तिथि का क्षय यानी तिथि घटती है तो वह पर्व एक दिन पूर्व मनाने का विधान है, लेकिन उत्तरदाई एकादशी की तिथि घटने के बाद भी यह व्रत 30 दिसंबर की सुबह 7:50 से शुरू होकर 1 जनवरी की तड़के 1:47 तक होगा. एकादशी विद्या दशमी और एकादशी विद्या द्वादशी में यह व्रत होने से श्रद्धालुओं को इसका कई गुना फल प्राप्त होगा.
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Priyanshu Gupta
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