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Ram Ji Ka Pura Naam : क्या आप जानते हैं राम जी का पूरा नाम क्या है? यहां जानिए

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Ram Ji Ka Pura Naam Kya Tha In Hindi : भगवान श्री राम को हम अनेक नामों से जानते हैं, लेकिन उनके ‘पूरे नाम’ और उनके नाम के पीछे छिपे अर्थ की गहराई को समझना वास्तव में भारतीय संस्कृति और दर्शन को समझना है. वाल्मीकि रामायण और अन्य पुराणों के अनुसार, उनके नाम की महिमा उनके व्यक्तित्व की तरह ही अनंत है. आइए जानते हैं इस बारे में और विस्तार से…

1. मुख्य नाम: श्री रामचन्द्र-
भगवान राम का पूरा और औपचारिक नाम ‘श्री रामचन्द्र’ (Shri Ramachandra) है.

‘राम’ शब्द की उत्पत्ति ‘रमु क्रीडायाम्’ धातु से हुई है, जिसका अर्थ है “वह जो पूरी सृष्टि के कण-कण में रमता है” या “जिसमें योगी जन रमण करते हैं.”

‘चन्द्र’ शब्द उनके मुख की सौम्यता और शीतलता को दर्शाता है. कहा जाता है कि जब उनका जन्म हुआ, तो उनका मुख चन्द्रमा के समान अत्यंत सुंदर और शांत था, इसलिए उनके नाम के पीछे ‘चन्द्र’ शब्द जुड़ गया.

2. उपनाम और वंश के आधार पर नाम-
प्राचीन परंपरा के अनुसार, व्यक्ति का नाम उसके कुल और वंश से भी जुड़ा होता है। इस दृष्टि से उनके कुछ अन्य ‘पूरे नाम’ इस प्रकार हैं-

राघव (Raghav): राजा रघु के वंशज होने के कारण उन्हें ‘राघव’ कहा जाता है.

दाशरथि (Dasharathi): महाराज दशरथ के पुत्र होने के नाते उन्हें ‘दाशरथि राम’ भी कहा जाता है.

रघुनन्दन (Raghunandan): रघु कुल को आनंदित करने वाले.

3. ‘श्री’ का महत्व-
राम के नाम के आगे ‘श्री’ लगाना केवल सम्मान का प्रतीक नहीं है. ‘श्री’ का अर्थ होता है शक्ति और लक्ष्मी. माता सीता को साक्षात लक्ष्मी (श्री) का स्वरूप माना गया है. इसलिए जब हम ‘श्री राम’ कहते हैं, तो हम ‘सीता-राम’ दोनों का आवाहन एक साथ करते हैं. शक्ति के बिना शिव और श्री के बिना राम अधूरे माने जाते हैं.

4. मर्यादा पुरुषोत्तम: एक उपाधि-
राम का पूरा नाम अक्सर ‘मर्यादा पुरुषोत्तम राम’ के रूप में लिया जाता है. यह नाम नहीं, बल्कि एक उपाधि है जो उन्हें दुनिया का सबसे श्रेष्ठ पुरुष (पुरुषोत्तम) और नियमों व सीमाओं (मर्यादा) का पालन करने वाला बनाती है। उन्होंने अपने जीवन के हर चरण में एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श राजा की मर्यादा स्थापित की.

5. राम नाम का आध्यात्मिक रहस्य-
तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहा है कि राम का नाम स्वयं राम से भी बड़ा है.

‘र’ अक्षर अग्नि का बीज मंत्र है, जो कर्मों को जलाता है.

‘आ’ की मात्रा सूर्य का प्रतीक है, जो अज्ञान के अंधेरे को मिटाती है.

‘म’ अक्षर चन्द्रमा का प्रतीक है, जो शांति प्रदान करता है.

Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह एक्सपर्ट्स से बातचीत पर आधारित है. यह सामान्य जानकारी है, पर्सनल सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए News-18 जिम्मेदार नहीं होगा.

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