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Ram Mandir 1st Anniversary 2025: आज 5 शुभ संयोग में अयोध्या राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ मनाई जा रही है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि रामलला प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पर कौन से 5 शुभ संयोग…और पढ़ें
अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ आज 11 जनवरी शनिवार को है. आज 5 शुभ संयोग में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ मनाई जा रही है. पिछले साल 2024 में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि रामलला प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पर कौन से 5 शुभ संयोग बने हैं और घर पर राम जी की पूजा कैसे करें?
22 जनवरी 2024 को हुई थी प्राण प्रतिष्ठा, पर वर्षगांठ आज क्यों?
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को हुई थी. इस वजह से इस साल भी हिंदू कैलेंडर की तिथि को ही प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ के लिए चुना गया है, न कि अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख 22 जनवरी को. इस वजह से ही आज रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का महोत्सव मनाया जा रहा है.
प्राण प्रतिष्ठा पहली वर्षगांठ पर बने 5 शुभ संयोग
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आज रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पर 5 शुभ संयोग बने हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07:15 ए एम से दोपहर 12:29 पी एम तक है, वहीं अमृत सिद्धि योग भी सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:29 बजे तक है. शुक्ल योग प्रात:काल से लेकर सुबह 11 बजकर 49 मिनट तक है. उसके बाद ब्रह्म योग पूरे दिन है.
इन 4 शुभ योगों के अलावा आज के दिन कूर्म द्वादशी भी है. इस दिन भगवान विष्णु ने सागर मंथन के लिए कूर्म अवतार लिया था. इस वजह से आज के दिन भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा करते हैं, जिससे मोक्ष की प्राप्ति होती है.
घर पर रामलला की पूजा विधि
आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:08 बजे से 12:50 बजे तक है. यह बेहद ही शुभ समय माना जाता है. इस मुहूर्त में आप पूजा घर में रामलला की छोटी मूर्ति की स्थापना करें. उसके बाद पंचामृत से रामलाल का अभिषेक करें. उस दौरान मंत्र पयोदधिघृतं चैव मधु च शर्करायुतं। पंचामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम॥ पढ़ लें.
उसके बाद जल से स्नान कराएं. फिर प्रभु राम का वस्त्र, फूल, माला, चंदन, मुकुट, धनुष, बाण आदि से श्रृंगार करें. उसके बाद अक्षत्, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजन करें. लड्डू, खीर, घर पर बने 56 भोग का भोग लगाएं. रामचरितमानस का पाठ करें. सबसे अंत में राम जी की आरती करें.
श्रीराम जी की आरती
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।

















