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Sabarimala Mandir Usha Puja: क्या है सबरीमाला मंदिर में की जाने वाली ऊषा पूजा? जानें कब होती है पूजा और क्या मिलते हैं लाभ

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Sabarimala Mandir Usha Puja: केरल के सबरीमाला मंदिर में ऊषा पूजा का विशेष महत्व है. मोहनलाल ने ममूटी के लिए ऊषा पूजा करवाई, जिससे विवाद हुआ. लेकिन इस मामले के बाद लोगों के मन में सबरीमाला मंदिर में होने वाली ऊष…और पढ़ें

क्या है सबरीमाला मंदिर में की जाने वाली ऊषा पूजा? जानें कब होती है पूजा

Sabrimala Mandir Usha Puja: क्या है सबरीमाला मंदिर में की जाने वाली ऊषा पूजा? जानें कब होती है पूजा और क्या मिलते हैं लाभ

हाइलाइट्स

  • सबरीमाला मंदिर में ऊषा पूजा का विशेष महत्व है.
  • मोहनलाल ने ममूटी के लिए ऊषा पूजा करवाई.
  • इस्लामिक कट्टरपंथियों ने आलोचना की और माफी की मांग की.

Sabarimala Mandir Usha Puja: केरल में स्थित प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर को दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ स्थल माना जाता है. सबरीमाला मंदिर में की जाने वाली ऊषा पूजा का बहुत महत्व माना जाता है. लेकिन फिलहाल देशभर में भगवान अय्यप्पा की ऊषा पूजा को करवाना साउथ एक्टर मोहनलाल पर भारी पड़ गया. मोहनलाल ने सबरीमाला मंदिर में अपने दोस्त ममूटी के लिए ऊषा पूजा करवाई,  जिससे उनको सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है.

लेकिन इस मामले के बाद कई लोगों के मन में सबरीमाला मंदिर में होने वाली ऊषा पूजा के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ गई है. तो ऐसे में अगर आप भी जानना चाहते हैं कि ऊषा पूजा कब करवाई जाती है और क्यों तो आइए इस विस्तार से जानते हैं ऊषा पूजा के बारे में.

क्या कहलाती है ऊषा पूजा
ऊषा पूजा यानी सुबह की पूजा, जो कि मंदिर खुलने के बाद गर्भगृह में की जाती है. ऊषा पूजा में भगवान अयप्पा को विधिवत पूजा की जाती है और इस पूजा में ‘ऊषा पूजा’ में नेय्याभिषेकम (घी डालना) और अन्य अनुष्ठान शामिल हैं. जानकारी के अनुसार, यह पूजा सुबह 7.30 बजे तक की जाती है.

ऊषा पूजा में होती है हर मनोकामना पूरी
भक्तों का मानना है कि जो भी भक्त भगवान अयप्पा की ऊषा पूजा में शामिल होता है, उसकी सभी मनोकामनाएं व मनचाही इच्छा भगवान पूरी करते हैं. इसी मनोकामना को लिये दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन को आते हैं.

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अय्यप्पा स्वामी को माना जाता है ब्रह्मचारी
दक्षिणी मान्यता के अनुसार भगवान अयप्पा स्वामी को ब्रह्मचारी माना गया है. इस मंदिर में जाने के श्रद्धालुओं को घने जंगलों से पैदल मंदिर तक पहुंचना होता है. यह इरुमली से शुरु होता है और करीब 61 किलोमीटर लंबा है, जबकि वंदीपेरियार से इस मंदिर की दूरी करीब 12.8 किलोमीटर और चालकयम से 8 किलोमीटर है. कहा जाता है कि भगवा अय्यपा चालयकम से यहां आए थे.

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