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Sheetala Ashtami 2025: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतलाअष्ट्मी मनाई जाएगी. इस दिन माता शीतला की पूजा से रोगों से रक्षा मिलती है. शीतलाअष्ट्मी के दिन बासी खाना खाने की परंपरा है क्योंकि इस दिन गर्…और पढ़ें
22 मार्च को रखा जाएगा शीतलाअष्ट्मी का व्रत.
हाइलाइट्स
- 22 मार्च 2025 को मनाई जाएगी शीतला अष्टमी.
- इस दिन माता शीतला की पूजा से रोगों से रक्षा मिलती है.
- शीतला अष्टमी पर बासी खाना खाने की परंपरा है.
देवघर. चैत्र का महीना शुरु हो चूका है. चैत्र के महीने में मौसम का भी बदलाव होता है. इसी महीने में हमलोग गर्मी के महीने मे प्रवेश करते हैं. मौसम बदलने के साथ ही लोगों में बीमारियां भी बढ़ जाती हैं. वहीं चैत्र के महीने मे ही सितालस्टमी भी मनाया जाता है. इसमें माता शीतला की पूजा आराधना की जाती है. माना जाता है की माता शीतला की पूजा आराधना करने से सभी रोग खत्म हो जाता है. कोई भी बीमारी गाँव या शहर में प्रवेश नहीं कर पाती है. तो आईये देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते है की कब है शीतलाअष्ट्मी और क्या है महत्व?
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुदगल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने Bharat.one के संवाददाता से बातचित करते हुए कहा की चेत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्ट्मी तिथि को माँ शीतला की पूजा आराधना की जाती है. इस साल 22 मार्च को शीतलाअष्ट्मी का व्रत रखा जाएगा. शीतलाअष्ट्मी के दिन व्रत रखकर माँ शीतला की पूजा आराधना करते हैं, तो किसी भी प्रकार के रोग या संक्रमण रक्षा करती है. वहीं इस त्यौहार को बासौरा भी कहा जाता है.
कब से शुरु हो रहा चेत्र माह का अष्ट्मी तिथि
ज्योतिषाचार्य बताते है ऋषिकेश पंचांग के अनुसार चेत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्ट्मी तिथि की शुरुआत 22 मार्च 2025 को सुबह 04 बजकर 23 मिनट से हो रहा है और समापन अगले दिन 23 मार्च 2025 सुबह 05 बजकर 23 मिनट मे समाप्त होगा. उदयातिथि और दिनभर अष्ट्मी तिथि 22 मार्च को रहेगा. इस लिए 22 मार्च को हीं रखा जाएगा शीतलाअष्ट्मी का व्रत.
इस दिन खाया जाता है बासी खाना
शीतलाअष्ट्मी के दिन ठंडा भोजन खाने का परम्परा है. यानी की शीतलाअष्ट्मी के दिन गर्म भोजन नहीं किया जाता है.क्युकी इस दिन भोजन नहीं पकाया जाता है. अगर शीतलाअष्ट्मी के दिन भोजन करना हो तो एक दिन पहले का यानी बासी भोजन करें. माता शीतला को बासी भोजन का हीं भोग लगाया जाता है. ऐसा करने से माता शीतला प्रशन्न होती है और कई प्रकार के रोग,संक्रमण से रक्षा करती है.
Deoghar,Jharkhand
March 16, 2025, 21:12 IST
Sheetala Ashtami: कब रखा जाएगा शीतला अष्टमी का व्रत? ऐसे करें माता की पूजा
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

















