Last Updated:
अयोध्या: सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है. पितृपक्ष की अवधि 15 दिनों की होती है और इस दौरान लोग अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए अनेक प्रकार के उपाय करते हैं. ऐसी स्थिति में पितृपक्ष में कुछ कार्यों से बचना चाहिए. तो चलिए जानते हैं….

पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है और 21 सितंबर को पितृपक्ष का समापन होगा. इस दौरान पितरों की पूजा-आराधना की जाती है और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. पितृपक्ष में हमेशा सात्विक जीवन जीने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस दौरान कई कार्य करने से विभिन्न प्रकार की हानि भी हो सकती है.

अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि पितृपक्ष की अवधि चल रही है. सनातन धर्म को मानने वाले लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए उन्हें तर्पण, पिंडदान और श्रद्धा जैसे कार्य कर रहे हैं. पितृपक्ष की अवधि में पितृ 15 दिनों तक अपने परिजनों के बीच रहते हैं, ऐसी स्थिति में इस दौरान भूल कर भी कुछ गलतियां करने से बचना चाहिए.

पितृपक्ष की अवधि में मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए. साथ ही, इस दौरान लहसुन और प्याज जैसी तामसिक प्रवृत्तियों के भजन को ग्रहण नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से पितृ नाराज होते हैं और कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं.

पितृपक्ष की अवधि में कुछ चीजें खरीदने से भी बचना चाहिए. इस दौरान नए कपड़े की खरीदारी नहीं करनी चाहिए और सोने-चांदी की खरीदारी से भी परहेज करना चाहिए. कोई भी नया सामान इस समय खरीदा जाए तो पितृ नाराज हो सकते हैं.

पितृपक्ष के दौरान कोई भी शादी, शुभ मुहूर्त या मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए. खासकर जूते, चप्पल और पूजा सामग्री की खरीदारी से भी बचना चाहिए. ऐसा करने से पितृ दोष लग सकता है.

पितृपक्ष के दौरान श्रद्धा से जुड़ी चीजें सीधे खरीदनी चाहिए, जिसमें काला तिल, चमेली का तेल, चावल, जो, कुश इत्यादि शामिल हैं. पितृपक्ष के दौरान इस तरह की खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है.

पितृपक्ष के दौरान अगर आप धार्मिक नियमों का पालन करते हैं और पितरों का श्राद्ध, तर्पण करते हैं, तो इससे जीवन की हर परेशानी दूर होती है और पितृ दोष से भी मुक्ति प्राप्त होती है.

















