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Teja Dashmi 2025: नागों के देवता कौन हैं? जानिए तेजाजी महाराज की कहानी, जिसने 1 वचन के लिए दिया अपना बलिदान

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Teja Dashami 2025: तेजा दशमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाई जाती है. जो कि इस बार 2 सितंबर को है. इस दिन तेजाजी महाराज की पूजा की जाती है. यह सांपो के देवताओं के रूप मे भी पूजे जाते है. आखिर ऐसा क्यो…और पढ़ें

उज्जैन. हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं के पूजन के साथ लोक देवताओं के पूजन का भी विशेष महत्व है. इतिहास में कई ऐसे वीर महापुरूष हुए हैं, जिन्होंने वचन निभाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान तक दे दिया. ऐसे ही वीरों में एक नाम शामिल है, तेजाजी महाराज का, जिन्होंने गायों की रक्षा के लिए एक सांप को दिया वचन भी निभाया. अपने प्राण न्यौछावर करने वाले गौ रक्षक तेजाजी आज जन-जन के बीच लोक देवता तेजाजी महाराज के रूप में पूजे जाते हैं. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते है कि कैसे यह नागों के देवता कहलाए गए.

मालवा-राजस्थान मे सबसे जायदा पूजे जाते हैं तेजाजी महाराज 
बात करें तेजाजी महाराज के जन्म की तो, राजस्थान में नागौर जिले के खरनालियां गांव में तेजाजी का जन्म हुआ था. नागवंशी क्षत्रिय जाट घराने के एक जाट परिवार में जन्में वीर तेजाजी सामान्य किसान के बेटे थे. तेजाजी के पिता ताहड़ देव और माता रामकंवरी भगवान शिव के उपासक थे. मान्यता है कि माता रामकंवरी को नाग-देवता के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति हुई थी. जन्म के वक्त तेजाजी की आभा और चेहरे के तेज को देखते हुए उनका नाम तेजा रखा. माता-पिता ने जन्म के बाद मात्र 9 माह की आयु में ही उनका विवाह 6 माह की पेमल के साथ अजमेर जिले के पुष्कर में करवाया.

ऐसे निभाया सांप को दिया वचन
तेजाजी के मन-वचन में सत्य की भावना छाई हुई थी. समाज सेवा में पर पीड़ा, जीव दया और नारी की रक्षा के लिए तेजाजी ने कभी भी अपने प्राणों की परवाह नहीं की. लाछा गुर्जरी की गायों को बचाने के लिए डाकूओं से लोहा लिया. गायों की रक्षा के लिए जाते वक्त आग में जल रहे सर्प को बचाया तो जोड़े से बिछुड़ जाने के कारण सांप क्रोधित हो गया और तेजाजी को डसने लगा.

फिर सांप को दिया वचन 
तेजाजी ने उसे रोककर बताया कि वे गायों को बचाने जा रहे हैं. सांप को वचन दिया कि वापस लौटूंगा तब डस लेना. गौरक्षा युद्ध में तेजाजी घायल हो गए. वचन निभाने के लिए सांप के पास पहुंचे तो पूरे शरीर पर जख्म देखकर सांप ने डसने से मना कर दिया. तेजाजी ने वचन पूरा करने के लिए अपनी जीभ निकालकर कहा कि यहां घाव नहीं है. इस पर सांप ने जीभ पर डसा. वचन निभाते हुए गौ रक्षा के लिए दिए इस मार्मिक बलिदान के बाद तेजाजी को लोकदेवता मानकर पूजा जाने लगा.सर्प ने वचनबद्ध रहने से प्रसन्न होकर तेजाजी को वरदान दिया कि वह सर्पों के देवता बनेंगे. सर्प से डसे हर व्यक्ति का विष तेजाजी के थानक पर आने पर खत्म हो जाएगा.

क्यों चढ़ाई जाती है छतरी?
तेजाजी महाराज को छतरी इसलिए चढ़ाते हैं, क्योंकि मनोकामना पूरी होने पर भक्त सामूहिक रूप से तेजाजी मंदिरों पर जाकर ढोल-ढमाकों के साथ छतरी चढ़ाते हैं. यह एक प्रथा है जिसके माध्यम से भक्त अपनी इच्छाएं पूरी होने पर ईश्वर को धन्यवाद देते हैं और अपनी श्रद्धा व्यक्त करते है.

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Anuj Singh

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a…और पढ़ें

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has worked a… और पढ़ें

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Teja Dashmi 2025: नागों के देवता कौन हैं? जानिए तेजाजी महाराज की कहानी

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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