ऋषिकेश: देवउठनी एकादशी हिंदू धर्म में एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से जागते हैं और सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है. इसे देव प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है. यह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में आती है और इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके. वहीं इसी के दूसरे दिन तुलसी विवाह किया जाता है, जिसका अपना धार्मिक महत्व है.
Bharat.one के साथ बातचीत के दौरान उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित श्री सच्चा अखिलेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि इस वर्ष देवउठनी एकादशी का पर्व 12 नवंबर 2024 को मनाया जाएगा. इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. खास बात यह है कि देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह का आयोजन होता है, जो 13 नवंबर को होगा. इस दिन का धार्मिक महत्व इसलिए भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि तुलसी विवाह को विष्णु भगवान के साथ तुलसी माता का पवित्र मिलन माना जाता है. अगर किसी युवक या युवती का विवाह नहीं हो पा रहा है या उसमें किसी प्रकार की बाधा आ रही है, तो वे तुलसी विवाह के दिन विशेष उपाय कर सकते हैं.
विवाह में आ रही है बाधा तो करें ये उपाय
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय उनके सामने केसर, पीला चंदन या हल्दी का तिलक करना शुभ माना जाता है। इसके बाद उन्हें पीले फूल अर्पित किए जाते हैं. ऐसा करने से भगवान विष्णु शीघ्र विवाह का आशीर्वाद प्रदान करते हैं और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. अगर आप अपनी मनोकामना पूरी करना चाहते हैं, तो देवउठनी एकादशी के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं. पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है, और जल चढ़ाने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं. इस दिन तुलसी विवाह कराना शुभ माना जाता है. ऐसा करने से शादी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और जल्द ही विवाह का योग बनता है.
FIRST PUBLISHED : November 6, 2024, 07:44 IST
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