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unique story of this pond removing a stone full of water devotees puja here, सिर्फ एक छोटा पत्थर हटाते ही पानी से भर गई ये सूखी पोखरी! रहस्यों से भरी यहां की कहानी

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Mau News: मऊ में एक ऐसा पोखर है, जिसका कहानी काफी रहस्यमय है. कहा जाता है कि यहां एक ढेला हटाने से सुखा पोखर पानी से भर गया था. मठ पर बैठे हुए बुची सिंह बताते हैं कि यह पोखरा लगभग 250 वर्ष पुराना है. यह पोखरा बाबा घनश्याम दास की कृपा से बनाया गया है.

मऊ: जिले के मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर करहा स्थित पवित्र मठ बिरादरी धाम पर बना पोखरा जल संरक्षण की मिसाल है. इस पोखरे का पानी कभी सूखता नहीं है. यहां पर रामनवमी, एकादशी आदि कई अवसरों पर भव्य मेले का आयोजन हर वर्ष होता है और साल में तीन बार यहां आयोजन किया जाता है. यहां लोग इस पोखरे में आकर स्नान कर बगल में बने मठ पर समाधि की पूजा पाठ करते हैं. आइए जानते हैं कि इस पोखरे की क्या कहानी है.

Bharat.one से बात करते हुए मठ पर बैठे हुए बुची सिंह बताते हैं कि यह पोखरा लगभग 250 वर्ष पुराना है. यह पोखरा बाबा घनश्याम दास की कृपा से बनाया गया है. लोगों का मानना है कि बाबा घनश्याम दास का जन्म यहां कुटी के पास चक जाफरी में हुआ था, लेकिन वह बचपन में ही गोविंद शाह के पास चले गए. वहां पर उनके यहां रहने लगे, लेकिन गोविंद शाह के निर्देश पर फिर वह अपने गांव चले आए. अपने प्रारंभिक दिनों में बाबा यहां जंगलों में गाय चराते थे. दोपहर का भोजन उनकी मां खुद लेकर जाया करती थी. इसी बीच एक दिन भोजन के उपरांत उन्हें पानी की कमी हुई. घने जंगल में उन्हें समय पर पानी मिलना बड़ा कठिन था.

एक ढेला हटाने से बन गई पूरी पोखरी

घनश्याम बाबा की मां पानी लेने के लिए पोखर के पास गई तो पोखरा सूखा हुआ था. वह गांव की तरफ मुड़ी ही थी कि बाबा ने कहा कि गांव ना जाएं, इसी सूखे पोखरी से एक ढेला हटाएं. जैसे ही उनकी मां ने पोखरी से एक ढेला हटाया, देखते ही देखते इस पोखरी में शीतल जल की धारा भर गई. फिर क्या इस पोखर से पानी से ही बाबा घनश्याम दास ने अपनी प्यास बुझाई और इस जैसे-जैसे पीढ़ी बढ़ती गई, इस पोखरी का धीरे-धीरे विस्तार होता गया. इस पोखरी के चारों तरफ सीढ़ियां बनाने के लिए एक बार सुखाया गया था और उसके बाद से इसमें आज तक कभी भी सुखा नहीं पड़ा.

पाताल लोक रखा गया पोखरी का नाम

इस पोखरी का नाम पाताल लोक रखा गया है, जहां मऊ, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर और वाराणसी जैसे बड़े-बड़े शहरों से लोग तालाब में आकर स्नान करते हैं और इस पोखरे के बगल में ही बने बाबा घनश्याम दास के समाधि पर लोग पूजा पाठ करते हैं और अपनी मुरादों को मानते हैं. लोगों का मानना है कि इस पोखरे में साथ समुंदरों का पानी भी लाकर मिलाया गया है, जिससे इस पोखर का महत्व और बढ़ गया है. इस पोखरे के बीच में ही भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित की गई है. सूर्य की पहली किरण इसी प्रतिमा पर पड़ती है और लोग यहां सुबह से शाम तक जाकर स्नान करते रहते हैं और पूजा पाठ करते रहते हैं.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Bharat.one से जुड़ गए.

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सिर्फ एक छोटा पत्थर हटाते ही पानी से भर गई ये सूखी पोखरी! रहस्यों से भरी कहानी

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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