Home Uncategorized Vaishali Baba Bateshwar Nath Dham offers baingan to mahadev

Vaishali Baba Bateshwar Nath Dham offers baingan to mahadev

0
0


प्रभात कुमार/वैशाली: जब बात महादेव की पूजा की आती है, तो जेहन में भांग, धतूरा, बेलपत्र और दूध का ख्याल आता है. लेकिन बिहार के वैशाली जिले में एक ऐसा अनोखा शिवालय है, जहां की परंपरा सुनकर आप भी दांतों तले उंगली दबा लेंगे. जंदाहा प्रखंड के बाबा बटेश्वर नाथ धाम में भगवान शिव को कोई कीमती पकवान नहीं, बल्कि सब्जी का राजा कहा जाने वाला ‘बैंगन’ चढ़ाया जाता है. आपने सही सुना है. यहां बैंगन चढ़ाने से ही भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं. आइए जानते हैं इस मंदिर की कहानी.

क्यों चढ़ाया जाता है बैंगन?
अमूमन बैंगन को रसोई तक सीमित माना जाता है, लेकिन बटेश्वर धाम में यह गहरी आस्था का प्रतीक है. स्थानीय बुजुर्गों और जानकारों के मुताबिक, इस अनोखी परंपरा के पीछे एक दिल छू लेने वाली कहानी है. कहा जाता है कि सदियों पहले इस क्षेत्र में भीषण अकाल पड़ा था. दाने-दाने को तरसते भक्तों के पास महादेव को चढ़ाने के लिए कुछ नहीं बचा था. उस कठिन समय में केवल बैंगन की पैदावार सुलभ थी. भक्तों ने अपनी लाचारी और सच्ची श्रद्धा के साथ वही बैंगन बाबा के चरणों में अर्पित कर दिया. महादेव उनकी सादगी और भक्ति पर ऐसे रीझे कि क्षेत्र में खुशहाली लौट आई. बस तभी से यह अटूट सिलसिला शुरू हो गया. आज आलम यह है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी बाज़ार से चुन-चुनकर सबसे अच्छे बैंगन बाबा के लिए लेकर आते हैं.

सावन और शिवरात्रि पर उमड़ता है जनसैलाब
यूं तो यहां साल भर भीड़ रहती है, लेकिन सावन और महाशिवरात्रि के दौरान मंजर देखने लायक होता है. पूरा वातावरण हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है. मंदिर की चौखट पर बैंगन के ढेर लग जाते हैं. आश्चर्य की बात यह है कि इस चढ़ावे को बाद में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है, जिसे लोग बड़े चाव से ग्रहण करते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस बैंगनी प्रसाद में बाबा की विशेष कृपा होती है.

क्या कहते हैं मंदिर से जुड़े लोग?
मंदिर की महिमा और इस परंपरा पर प्रकाश डालते हुए शशिकांत गिरी बताते हैं कि यह धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लोक विश्वास का केंद्र है. यहां हमलोग आठवीं पीढ़ी पूजा करवा रहे हैं. वट वृक्ष के तना से शिवलिंग उत्पन्न हुए हैं. यहां पर बिहार,  यूपी, दिल्ली और बंगाल से लोग आते हैं. यहां का मंदिर बंगाल के जजमान ने बनाया है.  मंदिर विकास कमेटी के कोषाध्यक्ष सह पुजारी मुन्ना बाबा का कहना है कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता.  यहां शिवलिंग अपने आप निकले हैं. राजा जनक पूजा अर्चना करते आते हैं. बाबा बटेश्वर केवल भाव के भूखे हैं. यहां महादेव मनोकामना पूरी करते हैं. यहां पर कच्चा बैंगन का भोग लगता है. उसको प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.
सामाजिक समरसता की मिसाल
यह धाम केवल अपने अनोखे भोग के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता के लिए भी जाना जाता है. यहां जाति-पाति और ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं है. मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है. अगर आप भी महादेव के भक्त हैं और कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो वैशाली के इस अद्भुत धाम में बैंगन लेकर हाजिरी लगाना न भूलें. यहां की अनोखी परंपरा और अटूट विश्वास वाकई इसे दुनिया के अन्य शिवालयों से अलग बनाता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here