
रीवा. रीवा सहित समूचे विन्ध्य क्षेत्र में विवाह के दौरान ऐसी रस्में और रिवाज देखने को मिलता है जो किसी को भी विवाह में शामिल होने के लिए ओत प्रोत कर देती हैं. विंध्य क्षेत्र अपनी अलग लोक कला और संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में काफी मशहूर है. वैसे यहां का विवाह संस्कार एक विशेष परंपरा के तरह मनाया जाता है. रीवा में विवाह तीन से आठ दिनों के होते हैं, जिनमें कई रस्में निभाई जाती हैं जो काफी खूबसूरत होती है और महत्वपूर्ण भी.
जिसमें विभिन्न प्रकार की रस्मों को सम्पन्न किया जाता है. वहीं आज हम आपको विंध्य क्षेत्र में मंडप छुड़ाई रस्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे विंध्य की बोली में मड़वा छुड़ाई जाता है.
मंडवा में इसलिए होता है बांस का प्रयोग
एक स्थानीय ने बताया कि मंडवा रस्म का महत्व विवाह में बहुत होता है. शादी के मण्डप (मड़वा) में बांस का उपयोग इसलिए करते हैं. क्योंकि बांस लंबा होता है और उसमें गांठ बढ़ते जाता है, वैसे ही परिवार की भी वृद्धि हो इसलिए बांस का उपयोग किया जाता है. मंडप को समधी के हाथों से ही विवाह के बाद खोला जाता है. जिसे रंग मसाला या मड़वा छुड़ाई की रस्म कहते हैं.
समधियों का महिलाओं जैसा श्रृंगार
इस रस्म में लड़के पक्ष के समधी और लड़की पक्ष की समधन मंडप के निचे होते हैं समधिनों द्वारा समधियों का श्रंगार महिलाओं की तरह किया जाता है उन्हें चूड़ियां, माला, कंडी, काजल लगया जाता है और ताबड तोड़ रंग गुलाल लगाया जाता है. उसके बाद समधीयों द्वारा सभी समधिनो यानी की लड़की की मां, चाची, ताई सबको अपने गौछे से बांधते हैं. जिसके लिए लडकी के पिता द्वारा उन्हें नेग यानि इनाम दिया जाता उसके बाद समधी समधन को छोड़ते और मंडप की एक डाल निकाल कर वेदी में रख देते हैं. यहीं से यह रस्म पूरी होती है जिसे मड़वा छुड़ाई रस्म या रंग मसाला रस्म कहते हैं.
मंडवा रस्म का जानें महत्व
जानकारों के मुताबिक भगवान राम और माता सीता के विवाह में भी यह रस्म निभाई गई थी और विंध्यवासी भगवान राम को अपना राजा मानते हैं और वह लगभग सभी उन परम्पराओं को निभाते हैं जो विवाह के दौरान मिथिला में निभाई गई थी.
FIRST PUBLISHED : December 25, 2024, 16:15 IST

















