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Why Om Is Used Before Mantras। ओम से ही क्यों होती है हर मंत्र की शुरुआत

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Why Om Before Mantra: सुबह की शांति में मंदिर की घंटी बजती है, घर के किसी कोने से मंत्रोच्चार की धीमी आवाज़ आती है और लगभग हर बार, शुरुआत एक ही ध्वनि से होती है: ॐ. यह संयोग नहीं है. हिन्दू धर्म में मंत्र जप की शुरुआत ‘ॐ’ से करना उतना ही स्वाभाविक माना गया है जितना सांस लेने से पहले हवा का होना. कई लोग रोज़ मंत्र पढ़ते हैं, लेकिन यह सवाल अक्सर मन में उठता है कि हर मंत्र के आगे ॐ क्यों लगाया जाता है? क्या बिना ॐ के मंत्र अधूरा है, या यह सिर्फ श्रद्धा का प्रतीक भर है? शास्त्रों, योग परंपरा और अनुभव तीनों में इसके जवाब मिलते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

ॐ क्या है और इसका मूल अर्थ
ॐ कोई साधारण शब्द नहीं, बल्कि एक ध्वनि है. इसे ‘प्रणव’ भी कहा गया है. शास्त्रों के अनुसार यह तीन अक्षरों से मिलकर बना है अ, उ और म.
‘अ’ सृष्टि की शुरुआत का संकेत देता है, ‘उ’ पालन और निरंतरता का, जबकि ‘म’ अंत और लय का प्रतीक है. जब ये तीनों मिलते हैं, तो जीवन के पूरे चक्र को समेट लेते हैं. कई योग साधक मानते हैं कि ॐ का उच्चारण करते समय शरीर, मन और श्वास एक लय में आ जाते हैं. यही कारण है कि ध्यान या प्राणायाम से पहले भी ॐ बोला जाता है.

हर मंत्र से पहले ॐ क्यों बोला जाता है
मंत्र को शास्त्रों में ऊर्जा का वाहक माना गया है. लेकिन हर ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए एक आधार चाहिए. ॐ वही आधार है.

भगवद्गीता में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि किसी भी वैदिक मंत्र की शुरुआत ॐ से करना पुण्यकारी और फलदायी होता है. यह मंत्र को “सेट” करने जैसा है, जैसे किसी वाद्य यंत्र को बजाने से पहले उसे ठीक सुर में लाना.

मंत्र शुद्धि और शक्ति का सिद्धांत
जब किसी मंत्र से पहले ॐ जोड़ा जाता है, तो उसे मंत्र-शुद्धि मिलती है. माना जाता है कि इससे मंत्र की कंपन शक्ति कई गुना बढ़ जाती है. अगर जप के दौरान उच्चारण में हल्की-सी गलती भी हो जाए, तो ॐ उस दोष को कम कर देता है. यही कारण है कि गृहस्थ जीवन में भी लोग बिना ज्यादा शास्त्रीय ज्ञान के मंत्र जप कर पाते हैं.

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ॐ और मनोवैज्ञानिक असर
यह सिर्फ आस्था की बात नहीं है. आधुनिक रिसर्च में भी पाया गया है कि ॐ का जप करने से दिमाग की तरंगें शांत होती हैं.
जब आप ॐ कहते हैं, तो सांस लंबी होती है, मन एकाग्र होता है और नकारात्मक विचारों की गति धीमी पड़ जाती है. यही मानसिक स्थिति मंत्र जप के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है.

एक आम उदाहरण लें अगर मन भटका हुआ हो और आप सीधे मंत्र पढ़ना शुरू कर दें, तो शब्द तो निकलते हैं, लेकिन भाव नहीं जुड़ पाता. ॐ उस भाव को जगाने का काम करता है.

शास्त्रों में ॐ का स्थान
वेदों में ॐ को सृष्टि की पहली ध्वनि कहा गया है. माना जाता है कि सूर्य, आकाश और पंचतत्व all का मूल यही कंपन है.
इसीलिए कहा गया है कि ॐ में सभी वेदों और धर्म-शास्त्रों का सार समाया हुआ है. मंत्र से पहले ॐ लगाना प्रतीकात्मक रूप से सभी शास्त्रों का स्मरण करने जैसा है.

बिना ॐ के मंत्र जप का क्या?
परंपरागत मान्यता के अनुसार, जिस मंत्र के आगे ॐ नहीं होता, वह पूर्ण फल नहीं देता. बिना ॐ के मंत्र को अशुद्ध नहीं कहा जाता, लेकिन उसे अधूरा माना जाता है. ॐ जोड़ने से मंत्र की तीव्रता बढ़ती है और साधक की इच्छा जल्दी संकल्प में बदलती है.

ॐ केवल परंपरा नहीं, मंत्र की आत्मा है. यह मंत्र को शुद्ध करता है, उसकी शक्ति बढ़ाता है और साधक के मन को एकाग्र करता है. इसलिए हर जप से पहले ॐ का उच्चारण महत्वपूर्ण माना गया है.

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