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Facts of Badrinath Temple: देश के चार धामों में प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम एक तीर्थ स्थल है, जहां नर-नारायण दोनों ही मिलते हैं. बद्रीनाथ धाम में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. यहां विष्णु भगवान की पूजा की जाती …और पढ़ें
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रदीनाथ में कभी भी कुत्ते नहीं भौंकते.
Mysteries of Badrinath Temple: आप कभी न कभी बद्रीनाथ मंदिर या बद्रीनाथ धाम गए होंगे. नहीं भी गए तो इस पवित्र तीर्थस्थल के बारे में सुना जरूर होगा. यदि आप बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए होंगे तो हो सकता है बारिश भी हुई होगी. मंदिर के आसपास या परिसर में कुत्ते भी दिखे होंगे, लेकिन क्या आपने उस दौरान किसी भी कुत्ते को भौंकते देखा या सुना है? बारिश होने से पहले क्या कभी आपने बादल को गरजते सुना है? दरअसल, हम आपसे ऐसे सवाल इसलिए पूछ रहें, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि बद्रीनाथ धाम में कभी भी कुत्ते नहीं भौंकते. बिजली नहीं कड़कती, बादल नहीं गरजते. आखिर क्या है इसके पीछे कारण? इन बातों में कितनी सच्चाई है, क्या इसके पीछे कोई धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है या कोई वैज्ञानिक कारण है? जानते हैं यहां…
कहां है बद्रीनाथ मंदिर?
देश के चार धामों में प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम एक ऐसा धार्मिक तीर्थ स्थल है, जहां नर-नारायण दोनों ही मिलते हैं. बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं. यह उत्तराखंड के चमोली जिले के अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है. यहां बद्रीनाथ धाम में विष्णु भगवान की पूजा की जाती है. बद्री नाथ धाम का कपाट खुलने पर यहां भक्तों की भीड़ देखते ही बनती है.
कब जाएं बद्रीनाथ की यात्रा पर
यहां जाने के लिए बेस्ट मौसम गर्मी का है. यहां आप मई से लेकर नवंबर के बीच जा सकते हैं. साथ ही मई और जून, सिंतबर-अक्टूबर में बर्फबारी कम होती है, इसलिए इन महीनों में भी जाना बेस्ट माना जाता है. ठंड के मौसम में यहां का तापमान 1 से 14 डिग्री सेल्सियस रहता है.
बद्रीनाथ में क्यों नहीं भौंकते कुत्ते?
मोटिवेशनल स्पीकर भागवताचार्य देशमुख वशिष्ठ जी महाराज के अनुसार, यह बात सच है कि बद्रीनाथ में आपको कभी भी कुत्ता भौंकता नजर नहीं आएगा. इतना ही नहीं, यहां बिजली चमकेगी, लेकिन कड़केगी नहीं, बादल बरसेगा लेकिन गरजेगा नहीं. कभी भी बद्रीनाथ में न बादल गरजता है और ना ही बिजली कड़कती है, ना ही वहां के कुत्ते भौंकते हैं. इसके पीछे कारण ये है कि भगवान श्री हरी नारायण श्रीमन नारायण बदरीनाथ धाम में ध्यान मुद्रा में ध्यान लगा रहे हैं. ऐसे में प्रकृति भी उनके ध्यान में सहयोग कर रही है. उनके ध्यान को भंग नहीं करना चाहती. दूसरी जगह पहले बादल गरजते हैं फिर बरसते हैं, लेकिन बद्रीनाथ में बादल तो खूब आएगा लेकन कभी भी वह गरजेगा नहीं. ऐसा इसलिए, क्योंकि प्रकृति भी नहीं चाहती कि भगवान की तपस्या में कहीं बाधा न पड़ जाए.
वहीं, बिजली भी आएगी, चमकेगी भी, लेकिन कभी भी गरजेगी नहीं. ऐसा इसलिए कि कहीं श्री हरी नारायण की तपस्या में विघ्न न पड़ जाए. साथ ही वहां के कुत्ते भी इसलिए नहीं भौंकते कि प्रभु इस समय बैठकर ध्यान कर रहे हैं. कहीं उनके ध्यान में विघ्न न आ जाए. तपस्या भंग ना हो जाए.
अन्य पौराणिक मान्यताएं
कुछ अन्य पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रदीनाथ में विष्णु जी ने नारायण के रूप में अवतार लिया था. तब उन्होंने कुत्तों को ये श्राप दिया था कि वे इस स्थान पर कभी भी भौंक नहीं सकेंगे. दूसरी मान्यता ये है कि इस स्थान पर कुत्ते भगवान के सेवक होते हैं. ऐसे में इन्हें शांति से रहने का आदेश दिया जाता है. तभी यहां पर कुत्ते शांति से रहते हैं और कभी भी भौंकते हुए नहीं दिखते हैं.
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January 21, 2025, 12:06 IST
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