Chandra Grahan 2026: जब भी आकाश में सूर्य पर छाया पड़ती है, धरती पर हलचल बढ़ जाती है. Chandra Grahan 2026 को लेकर भी घर-घर में यही चर्चा है क्या ग्रहण के समय रखे भोजन में तुलसी डालकर उसे बाद में खाना सही है? दादी-नानी की सीख, मंदिरों की परंपरा और ज्योतिषीय मान्यताएं सब मिलकर इस सवाल को और रोचक बना देती हैं. आइए समझते हैं शास्त्र, ज्योतिष और आयुर्वेद की रोशनी में इस रहस्य को. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
चंद्र ग्रहण और सूतक काल का ज्योतिषीय प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य आत्मा, ऊर्जा और जीवन शक्ति का प्रतीक है. वहीं चंद्र मन का प्रतीक है जब ग्रहण लगता है, तो इसे ग्रहों की विशेष स्थिति का परिणाम माना जाता है. मान्यता है कि ग्रहण काल में वातावरण की सूक्ष्म तरंगें प्रभावित होती हैं. इसी वजह से सूतक काल लगते ही पूजा-पाठ, भोजन पकाने और खाने पर रोक की परंपरा रही है.
ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बताते हैं कि शास्त्रों में ग्रहण के दौरान भोजन को ढककर रखने और उसमें तुलसी पत्र डालने की सलाह दी गई है. उनका कहना है, “तुलसी नकारात्मक प्रभावों को कम करने वाली पवित्र वनस्पति मानी गई है. ग्रहण के समय इसका प्रयोग आवश्यक माना गया है.”
तुलसी का धार्मिक महत्व: क्यों मानी जाती है पवित्र?
शास्त्रों की मान्यता
सनातन परंपरा में तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप कहा गया है. माना जाता है कि जहां तुलसी होती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. ग्रहण के दौरान पका हुआ भोजन जल्दी दूषित हो सकता है ऐसी लोकमान्यता है. इसलिए ग्रहण शुरू होने से पहले ही दूध, दही, पानी और भोजन में तुलसी पत्र डाल दिए जाते हैं.
धार्मिक दृष्टि से कहा जाता है कि तुलसी युक्त भोजन ग्रहण समाप्ति के बाद ग्रहण किया जा सकता है. कई परिवारों में आज भी यह परंपरा पूरी श्रद्धा से निभाई जाती है.
आयुर्वेद और वैज्ञानिक नजरिया
आयुर्वेद में तुलसी को औषधीय गुणों का भंडार माना गया है. इसके पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय में जब रेफ्रिजरेशन की सुविधा नहीं थी, तब भोजन को सुरक्षित रखने के लिए तुलसी का प्रयोग व्यावहारिक उपाय भी था. हालांकि आधुनिक विज्ञान यह नहीं मानता कि ग्रहण के कारण भोजन स्वतः दूषित हो जाता है, लेकिन तुलसी के गुणों को वह भी स्वीकार करता है. यानी आस्था और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से तुलसी का उपयोग तार्किक माना जा सकता है.
क्या तुलसी युक्त भोजन ग्रहण के बाद खा सकते हैं?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि भोजन में ग्रहण से पहले तुलसी डाल दी गई हो तो उसे ग्रहण समाप्ति के बाद खाया जा सकता है. कई घरों में ग्रहण के बाद स्नान कर, भगवान का स्मरण करके ही भोजन किया जाता है. दिल्ली की गृहिणी सीमा शर्मा बताती हैं, “हम बचपन से यही देखते आए हैं कि दादी पहले ही खाने में तुलसी डाल देती थीं. ग्रहण के बाद स्नान कर वही भोजन खाया जाता था.” यह उदाहरण दिखाता है कि यह परंपरा सिर्फ डर नहीं, बल्कि विश्वास और अनुशासन से जुड़ी है.
आस्था, परंपरा और व्यक्तिगत निर्णय
ग्रहण को लेकर हर परिवार की अपनी मान्यता होती है. कुछ लोग पूरी सख्ती से नियम निभाते हैं, तो कुछ इसे केवल सांस्कृतिक परंपरा मानते हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्णय श्रद्धा, सुविधा और समझ के आधार पर लिया जाए.
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