विदेशों तक में बाबा के अनुयायी
कम उम्र में ही पा लिया था अलौकिक ज्ञान

फिरोजाबाद जिले (उत्तर प्रदेश ) के अकबरपुर में बाबा नीम करौरी का जन्म हुआ था. बाबा का असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था. इनका जन्म लगभग 1900 ई. के आसपास का माना जा रहा है. इनको महाराज जी, नीम करौली, नींब करौरी, चमत्कारी बाबा, तलैया बाबा, हांडी वाले बाबा और तिकोनिया वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है.
नीबकरौरीबाबा डॉट कॉम से मिली जानकारी के मुताबिक, नीम करौरी बाबा की 11 वर्ष की उम्र में विवाह हो गया था. इसके बाद उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था. फिर बाबा ने गुजरात के ववानिया मोरबी में कई सिद्धियां हासिल कर नैनीताल जिले में भवाली से कुछ दूर आगे कैंची में अपना आश्रम बनाया था, जिसे लोग आज कैंची धाम के नाम से जानते हैं.
भक्त बताते हैं कि अपने जीवनकाल में बाबा ने विभिन्न जगहों पर करीब 108 हनुमान मंदिर बनवाए. कहा ये भी जाता है कि बाबा जी आडंबरों से दूर रहते थे. इसीलिए वह अपना पैर भी छूने नहीं देते थे. यदि कोई ऐसा करने का प्रयास करता भी था तो वे उनसे हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे.
9 सितंबर 1973 को बाबा कैंची धाम से वृंदावन के लिए रवाना हुए. यह बाबा की अंतिम यात्रा थी. 10 सितंबर को वह वृंदावन पहुंचे और 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में ही उन्होंने अपने शरीर का त्याग कर दिया था. यहां भी बाबा ने एक आश्रम बनवाया था, जहां आज भी बड़ी संख्या में बाबा के भक्त पहुंचते हैं.
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https://hindi.news18.com/news/dharm/tribute-at-kainchi-dham-on-baba-neeb-karoli-death-anniversary-read-all-about-in-hindi-ws-kln-9608551.html