Sankashti Chaturthi February 2026 Date: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इसे फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं. इस व्रत में प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा करते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं. चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना यह व्रत पूरा नहीं होता है. इस बार की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर सुकर्मा योग बन रहा है, जो एक शुभ योग है. आइए जानते हैं कि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कब है? द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त और चंद्रोदय समय क्या है?
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 तारीख
दृक पंचांग के आधार पर देखा जाए तो फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 फरवरी दिन गुरुवार को 12 बजकर 09 ए एम से प्रारंभ होगा. इस तिथि का समापन 6 फरवरी दिन शुक्रवार को 12 बजकर 22 ए एम पर होगा. उदयातिथि के आधार पर द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 फरवरी गुरुवार को रखा जाएगा.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन जिन लोगों को गणेश जी की पूजा करनी है, वे शुभ-उत्तम मुहूर्त 07:07 ए एम से 08:29 ए एम में कर लें. या फिर लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर 12:35 पी एम से 01:57 पी एम के बीच कर लें. उस दिन का ब्रह्म मुहूर्त 05:22 ए एम से 06:15 ए एम तक रहेगा. दिन का शुभ मुहूर्त यानि अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:13 पी एम से 12:57 पी एम तक है.
सुकर्मा योग में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन सुकर्मा योग और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है. सुकर्मा योग प्रात:काल से लेकर देर रात 12 बजकर 04 ए एम तक रहेगा. उसके बाद से धृति योग बनेगा. चतुर्थी पर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 57 मिनट तक है, फिर हस्त नक्षत्र है.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर चांद निकलने का समय
व्रत के दिन लोगों को चंद्रमा की प्रतीक्षा होती है, उस दिन चंद्रमा देर से निकलता है. द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर चांद निकलने का समय रात 09:35 पी एम है. इस समय पर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर राहुकाल
चतुर्थी के दिन राहुकाल दोपहर में है. राहुकाल दोपहर 01 बजकर 57 पी एम से लेकर 03 बजकर 19 पी एम तक है. राहुकाल में कोई शुभ काम न करें.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व
जो लोग द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर गणेश जी और चंद्रमा की पूजा करते हैं, उनके कष्ट दूर होते हैं. संकष्टी चतुर्थी मतलब वह चतुर्थी जो कष्टों और संकटों का निवारण कर दे. गणेश जी के अशीर्वाद से जीवन में सुख, समृद्धि, ज्ञान, बुद्धि, शुभता आदि की प्राप्ति होती है.
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