Home Astrology Satua Sankranti 2025 : सतुआ संक्रांति आज, इन चीजों का दान करने...

Satua Sankranti 2025 : सतुआ संक्रांति आज, इन चीजों का दान करने से देवों के साथ पितर भी होते हैं प्रसन्न

0
1


Last Updated:

Satua Sankranti 2025 Date: सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन सतुआ संक्रांति या मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है. इस दिन विधि विधान के साथ भगवान नारायण की पूजा अर्चना और सतुआ का दान करने का विशेष…और पढ़ें

सतुआ संक्रांति आज, इन चीजों का दान करने से देव और पितर होते हैं प्रसन्न

सतुआ संक्रांति 2025 का महत्व

हाइलाइट्स

  • सतुआ संक्रांति पर सत्तू का दान महत्वपूर्ण है.
  • सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से सतुआ संक्रांति मनाई जाती है.
  • सत्तू का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है.

ग्रहों के राजा सूर्य जब मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन को सतुआ संक्रांति के नाम से जाना जाता है. मलयालम, ओडिया, तमिल, बंगाल में सतुला संक्रांति से नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है. सतुला संक्रांति को सतुआन के नाम से भी जाना जाता है. सतुआ संक्रांति हिंदू धर्म में वह दिन है, जब घड़ा, पंखा, सत्तू और ठंडे फलों को दान कर लोग ढेरों पुण्य कमाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन दान करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है. आइए जानते हैं सतुआ संक्रांति का महत्व…

सतुआ संक्रांति पर करें इन चीजों का दान
सतुआ संक्रांति को गर्मी के मौसम की शुरुआत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने राजा बलि को पराजित करने के बाद सबसे पहले सत्तू का भोजन किया था और इसी वजह से इस दिन सत्तू का सेवन करना अत्यंत शुभ माना जाता है. काशी के ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि यह त्योहार भगवान सूर्य के राशि परिवर्तन से संबंधित है. इस दिन भगवान सूर्य राशि परिवर्तन करते हैं. सूर्य देव आज के दिन मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश कर चुके हैं. इस अवसर पर श्रद्धालु गंगा या अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं और फिर पूजा-पाठपाठ करते हैं. भगवान सूर्य की आराधना करने के बाद श्रद्धालु सत्तू, जल से भरा घड़ा, गुड़, मौसमी फल जैसे बेल, तरबूज, खरबूज, कच्चा आम समेत मौसम से जुड़ी चीजों का दान करते हैं.

पितर होते हैं तृप्त
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सतुआ संक्रांति के दिन भरा हुआ घड़ा दान करने से पितर तृप्त होते हैं. वहीं, सत्तू के दान से देव प्रसन्न होते हैं और पापों का नाश होता है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर होते हैं, यदि वे आज के दिन जल से भरा घड़ा दान करते हैं तो उनका चंद्रमा मजबूत होता है. उन्होंने आगे बताया कि भगवान सूर्य को समर्पित इस दिन को मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. भगवान सूर्य के राशि परिवर्तन करने के साथ ही खरमास का भी आज ही के दिन समापन हो जाता है. खरमास समाप्ति के साथ शुभ कार्य जैसे शादी, उपनयन संस्कार समेत अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं.

स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्णvrat
बता दें कि धर्म में सत्तू को जितना पवित्र माना जाता है उतना ही स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभदायक है. गर्मी के मौसम में सत्तू के सेवन से शरीर में एनर्जी बनी रहती है. सत्तू के बने शरबत से शरीर की तपन दूर होती है और यह शीतलता देता है. फाइबर से भरपूर सत्तू के सेवन से पेट की गर्मी दूर होती है और पाचन तंत्र भी मजबूत बनता है. आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि गर्मी के दिनों में लू से बचने के लिए घर से निकलने से पहले सत्तू या शरबत के सेवन से लू लगने का भय नहीं रहता है.

homedharm

सतुआ संक्रांति आज, इन चीजों का दान करने से देव और पितर होते हैं प्रसन्न


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/news/dharm/satuwa-sankranti-donate-for-virtue-and-health-on-sun-zodiac-change-9175192.html

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here