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Special Tradition: पीढ़ियों के रिवाज को निभा रहा मील समाज, होली के दिन शहर भर में सुनाई देती है बाबरिया ढ़ोल की गूंज, तीन दिन का विशेष आयोजन

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Special Tradition: भीनमाल की ऐतिहासिक घोटा गैर , जहां बाबरिया ढोल की गूंज और गैरियों का उत्साह पूरे शहर को झूमने पर मजबूर कर देता है! होली के इस खास मौके पर साल में सिर्फ एक बार बाहर निकलने वाला ये ढोल, सदियों …और पढ़ें

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बाबरिया

बाबरिया ढोल की थाप पर घोटा गैर में थिरकते गैरिऐ

हाइलाइट्स

  • भीनमाल में होली पर घोटा गैर का होता है आयोजन
  • साल में एक बार होली पर बजता है बाबरिया ढोल
  • सदियों पुरानी परंपरा निभाता है मील समाज

जालौर. भीनमाल में होली के अवसर पर ऐतिहासिक घोटा गैर का आयोजन धूमधाम से होता है.  पारंपरिक बाबरिया ढोल की ताल पर गैरियों ने पूरे जोश के साथ गैर नृत्य करते है और पुरानी परंपराओं को जीवंत रखते है. खास बात यह है कि बाबरिया ढोल की गूंज ने पूरे शहर को झूमने पर मजबूर होता है, वह साल भर नहीं बजता. यह ढोल केवल होली के अवसर पर बाहर निकाला जाता है और इसे छूने तक की इजाजत नहीं होती.

भीनमाल के राजा ने दी थी मील समाज को यह परंपरा…
ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो घोटा गैर की यह परंपरा भीनमाल के राजा द्वारा मील समाज को सौंपी गई थी. तब से लेकर आज तक मील समाज इस परंपरा को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ निभा रहा है. इस अवसर पर 36 कौम के लोग एकजुट होकर भाईचारे का संदेश देते हैं.

गाजे-बाजे के साथ गैरिये ये रस्म निभाते हैं…
सुबह गैरियों ने 36 कौम के घरों में जाकर ढोल-नगाड़ों के साथ जाते हैं  इसके बाद शाम को चंडीनाथ मंदिर से गैर नृत्य की शुरुआत होती है, जहां पूजा-अर्चना के बाद गैर बड़ी संख्या में शहर के प्रमुख बाजारों से बड़ा चौहटा पहुंचती है.

बाबरिया ढोल की गूंज पर झूमता है पूरा शहर…
बड़ा चौहटा पर बाबरिया ढोल की ताल पर करीब आधे घंटे तक गैर नृत्य होता है  युवा, बुजुर्ग और बच्चों ने इस ऐतिहासिक परंपरा में भाग लेते और होली का रंग-गुलाल उड़ाते हुए उल्लास के साथ नृत्य करते है.

तीन दिनों तक चलता है यह महोत्सव…
भीनमाल में यह उत्सव तीन दिनों तक चलता है, जिसमें गैर नृत्य और विभिन्न धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। वर्तमान समय में कई परंपराएं लुप्त हो रही हैं, लेकिन भीनमाल में घोटा गैर का उत्साह आज भी वैसा ही बरकरार है।

प्रशासन भी रहता है मुस्तैद…
होली के इस ऐतिहासिक आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए SP ज्ञानचंद यादव, DSP अन्नराजसिंह राजपुरोहित और SHO रामेश्वरलाल भाटी के नेतृत्व में बड़ा चौहटा पर पुलिस बल तैनात रहता है.

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साल में बस होली पर निकलता है बाबरिया ढ़ोल, घोटा गैर में झूमते है 36 कौम के लोग


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/culture-historical-ghota-gair-in-bhinmal-babaria-dhol-resonates-once-a-year-meel-community-has-been-following-the-tradition-of-the-king-for-years-local18-9104504.html

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