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जहां भगवान भोले ने वीरभद्र को शांत कर बना दिया शिवलिंग, उन्हीं के क्रोध से निकाला ऋषिकेश का ये मंदिर


Agency:Bharat.one Uttarakhand

Last Updated:

Veerbhadra Temple Rishikesh : यहां भगवान शिव के अनोखे रूप देखने को मिलते हैं. यहीं पर माता सती ने खुद को अग्नि में समर्पित किया था. इस जगह ने भोले बाबा का क्रोप भी खूब झेला है और उनका प्रेम भी इसे खूब मिला.

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ऋषिकेश का प्राचीन वीरभद्र मंदिर 

हाइलाइट्स

  • वीरभद्र मंदिर में भगवान शिव के अनोखे दर्शन होते हैं.
  • सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं यहां.
  • महाशिवरात्रि पर वीरभद्र मंदिर में भव्य मेला लगता है.

ऋषिकेश. उत्तराखंड का ऋषिकेश केवल प्राकृतिक सुंदरता और योग के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि यहां कई प्राचीन मंदिर भी हैं, जिनका गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्त्व है. ऋषिकेश के वीरभद्र का वीरभद्र मंदिर भी एक ऐसा ही मंदिर है, जो सैकड़ों साल पुराना है और भगवान शिव के एक अद्भुत रूप से जुड़ा है. वीरभद्र मंदिर एक ऐसी जगह है जहां भक्तों को भगवान शिव के अनोखे रूप के दर्शन होते हैं. यहां आकर भक्त शांति और सकारात्मक ऊर्जा महसूस करते हैं. मंदिर परिसर में एक विशेष शिवलिंग है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे खुद भगवान शिव के आदेश पर स्थापित किया गया था.

शिव के सबसे उग्र रूप

Bharat.one के साथ बातचीत में मंदिर के पुजारी पद्मेश थपियाल कहत हैं कि हिंदू धर्म में वीरभद्र भगवान शिव के सबसे शक्तिशाली और उग्र रूपों में से एक माने जाते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा दक्ष ने अपनी पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से कराया, तो वे इस रिश्ते से खुश नहीं थे. बाद में राजा दक्ष ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया. जब सती को ये बात पता चली तो वे अपने पति शिव की अनुमति लेकर यज्ञ में पहुंच गईं. वहां उनके पिता ने भगवान शिव का अपमान किया, जिससे व्यथित होकर सती ने खुद को यज्ञ की अग्नि में समर्पित कर दिया.

जब भगवान शिव को इस घटना का पता चला, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए. उनके क्रोध से वीरभद्र का जन्म हुआ, जो शिव का ही एक भयंकर रूप थे. वीरभद्र ने राजा दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया और पूरे यज्ञ स्थल में हाहाकार मचा दिया. बाद में जब भगवान शिव का क्रोध थोड़ा शांत हुआ, तो उन्होंने वीरभद्र को भी शांत किया और उन्हें यहां शिवलिंग रूप में स्थापित कर दिया. मान्यता है कि यही  स्थान वीरभद्र मंदिर है, जहां भगवान शिव ने वीरभद्र को शांत किया था.

शिवरात्रि पर विवाह-उत्सव

वीरभद्र मंदिर का महत्त्व महाशिवरात्रि पर बढ़ जाता है. यहां हर साल शिवरात्रि के दिन भव्य मेला लगता है. इसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आकर भगवान शिव के दर्शन करते हैं. भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर में रुद्राभिषेक, शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा खास मानी जाती है. माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस मंदिर में आकर भगवान शिव की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. शिवरात्रि के दिन इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह-उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है.

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जहां भोले ने खुद स्थापित कराया शिवलिंग, उन्हीं के क्रोध से निकाल ये मंदिर

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