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Dhanbad’s Famous Bihari Dhaba: धनबाद के पुराना बाजार में बबलू गुप्ता का बिहारी ढाबा के नाम से भोजनालय है. यहां कम कीमत पर बहुत ही टेस्टी मटन-चिकन परोसा जाता है, जिसके साथ चावल की अनलिमिटेड सप्लाई मिलती है.
धनबाद. धनबाद के पुराना बाजार स्थित रेल कोच के ठीक सामने ‘बिहारी ढाबा’ नाम से शुरू हुआ एक छोटा सा भोजनालय आज आम से खास लोगों का पसंदीदा ठिकाना बन चुका है. यहां मटन और चिकन की ऐसी लाजवाब दावत परोसी जाती है कि मजदूर वर्ग से लेकर कर्मचारी और व्यापारियों तक हर कोई भरपेट खाना खाने यहां जरूर पहुंचता है.
10 सालों का लिया अनुभव
इस ढाबे की शुरुआत बबलू गुप्ता ने की है, जो मूल रूप से बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. वे पिछले 10 वर्षों तक दिल्ली और नोएडा में रहकर खाना बनाने का अच्छा अनुभव हासिल कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि बड़े शहरों में काम करना तो अच्छा था. लेकिन हमेशा मन में था कि अपने लोगों के बीच काम करूं और उन्हें स्वादिष्ट और पौष्टिक खाना उपलब्ध कराऊं. इसी सोच के साथ वे धनबाद लौटे और पुराना बाजार में बिहारी ढाबा की स्थापना की.
अनलिमिटेड चावल मिलता है यहां
यहां की सबसे बड़ी खासियत है मटन और चिकन के साथ अनलिमिटेड चावल. बिलकुल सही सुना आपने! खाने की थाली मंगाने के बाद जितनी बार जरूरत पड़े, चावल की भरपाई बिना किसी अतिरिक्त पैसे के की जाती है. यह सुविधा खासकर मजदूर वर्ग के लिए किसी वरदान से कम नहीं, जो दिनभर कड़ी मेहनत के बाद पेट भरकर खाना चाहते हैं.
रोज बनता है 10 किलो मटन
बबलू गुप्ता बताते हैं कि ढाबे में रोज लगभग 10 किलो मटन और 6 किलो चिकन की बिक्री होती है. उनका कहना है कि 10 किलो मटन पकाने में करीब 5-6 किलो प्याज, लगभग 500 ग्राम लहसुन और खास ‘सीक्रेट मसाला’ का उपयोग किया जाता है, जिससे स्वाद में एक अलग ही खुशबू और टेस्ट आता है. मटन को पकाने में लगभग 40-50 मिनट का समय लगता है. इसी तरह 5 किलो चिकन पकाने में 2 किलो प्याज और मसालों का उपयोग किया जाता है. हर पीस का वजन लगभग 100 ग्राम रखा जाता है ताकि ग्राहकों को ठीक मात्रा मिले.
इस कीमत पर मिलता है चिकन-मटन
यहां दो पीस मटन की प्लेट 170 रुपये में और चिकन की प्लेट 90 रुपये में उपलब्ध है. 40 से 50 लोगों के बैठने की सुविधा होने के कारण खाने के समय ढाबा पूरी तरह भरा रहता है. बबलू का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ काम नहीं, बल्कि लोगों की भूख और स्वाद दोनों की पूर्ति करना है. यही वजह है कि यह ढाबा अब पुराना बाजार ही नहीं, आसपास के इलाकों में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है. धनबाद के लोगों के लिए यह ढाबा सिर्फ खाना खाने की जगह नहीं, बल्कि बिहार के असली स्वाद का अनुभव है. वह भी जेब पर भारी पड़े बिना.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए Bharat.one Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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