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Explainer- सर्दी में तिल की खपत बढ़ जाती है. इस मौसम में लोग तिल के लड्डू, रेवड़ी और गजक बड़े शौक से खाते हैं. तिल खाने में जितना स्वादिष्ट लगता है, उतना ही सेहत के लिए भी फायदेमंद है.
जनवरी में तिल का बहुत महत्व बढ़ जाता है. मकर संक्रांति और सकट चौथ पर खासकर तिल की पूजा होती है. इससे प्रसाद बनाया जाता है और इसका दान भी किया जाता है. ज्यादातर लोग तिल को सर्दी में ही खाते हैं लेकिन इसे 365 दिन खाया जा सकता है. तिल खाने से सेहत अच्छी रहती है. यह महिलाओं के लिए वरदान है. तिल को रोस्ट करके, सलाद में, सैंडविच में, रोटी में या कुकीज के डालकर खा सकते हैं. इसकी स्मूदी भी बन सकती है.
लगभग 6 हजार साल पुराना है तिल
तिल एक बीज है जो सबसे ज्यादा अफ्रीका में पैदा होता है. भारत में तिल की खेती लगभग 6 हजार साल पुरानी है. माना जाता है कि मेसोपोटामिया और भारत के बीच तिल का कारोबार होता था. सिंधू खाड़ी की सभ्यता में व्यापारी तिल के तेल को मेसोपोटामिया में एक्सपोर्ट करते थे. प्राचीन मिस्र में भी तिल की खेती होती थी. वहां इसका इस्तेमाल दवा के तौर पर होता था. प्राचीन मिस्र के राजा तूतनखामेन की मम्मी को खोजने के लिए हुई खुदाई में उसके पास से तिल की टोकरियां मिली थीं.
3 रंग के तिल
तिल 3 रंग के होते हैं-सफेद, काला और भूरा. इसकी भारत में अच्छी खासी पैदावार है. यह विटामिन बी, कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम से भरपूर होता है. बच्चा हो या बड़ा, यह हर किसी के लिए फायदेमंद है. इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए इसे सर्दी में ज्यादा खाया जाता है. तिल के अलावा इसका तेल भी खूब इस्तेमाल किया जाता है. कुछ लोग दुविधा में रहते हैं कि काले तिल फायदेमंद हैं या सफेद तिल. दोनों ही हेल्दी होते हैं लेकिन काले और भूरे तिल में एंटीऑक्सीडेंट होते है और इसमें सफेद तिल के मुकाबले ज्यादा विटामिन और प्रोटीन पाए जाते हैं. तीनों रंग के तिलों को मिलाकर एक साथ भी खाया जा सकता है. इन्हें गुड़ के साथ खाया जाए तो यह सेहत को दोगुना फायदा पहुंचाते हैं.
जापान में सबसे ज्यादा तिल खाए जाते हैं (Image-Canva)
सुपर फूड है तिल
डायटीशियन पूजा साहनी कहती हैं कि तिल में बहुत से गुण है जो इसे सुपरफूड बनाते हैं. तिल खाने से हड्डियां मजबूत होती हैं और जॉइंट्स का दर्द नहीं सताता. इससे पेट की सेहत अच्छी रहती है. खाना ठीक से पचता है. बाल और स्किन चमकदार बनती है. खून की कमी दूर होती है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है. इससे थायराइड भी कंट्रोल रहता है. तिल से बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है और ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहती है.
मेंस्ट्रुअल साइकिल ठीक रहती है
महिलाओं को 365 दिन तिल का सेवन करना चाहिए. इसे सीड साइकिल में शामिल करना चाहिए. दरअसल सीड साइकिल मेंस्ट्रुअल साइकिल में इस्तेमाल होती है. इसे मेंस्ट्रुअल साइकिल के ल्यूटियल फेज में खाना चाहिए जिससे प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन बैलेंस रहते हैं. दरअसल हर महिला की मेंस्ट्रुअल साइकिल अलग-अलग होती है. जैसे अगर किसी महिला की यह साइकिल 28 दिन की है तो उसकी मेंस्ट्रुअल साइकिल पीरियड्स शुरू होने के साथ शुरू होगी. पहले के 14 दिन फॉलिकल फेज होता है जिसमें एस्ट्रोजन रिलीज होते हैं. 15 से 17वां दिन ओव्यूलेशन का होता है और 18 से 28वां दिन ल्यूटियल फेज का होता है. अगर यह साइकिल ठीक चले तो महिला पीसीओडी या इनफर्टिलिटी की समस्या से दूर रह सकती है.
मेनोपॉज में फायदेमंद
जब ओवरी काम करनी बंद करती है तो महिलाओं को बहुत कष्ट होता है. मेनोपॉज के लक्षण झेले नहीं जाते. अचानक हॉट फ्लैशेज का आना, थकान, मूड स्विंग, वजन बढ़ना, बाल झड़ना उन्हें परेशान कर देता है. वहीं,मेनोपॉज के बाद अधिकतर महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस नाम की बीमारी का शिकार हो जाती हैं क्योंकि शरीर में एस्ट्रोजन बनने बंद हो जाते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाकर रखते हैं. इस समय अगर महिलाएं तिल खाएं तो इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है.
तिल ज्यादा खाने से लूज मोशन हो सकते हैं (Image-Canva)
तिल को खाने का तरीका
डायटीशियन पूजा साहनी के अनुसार तिल गर्म होते हैं इसलिए हर किसी के शरीर को सूट करे, ऐसा मुमकिन नहीं है. इसे एक चम्मच से ज्यादा नहीं खाना चाहिए और जब भी खाएं हमेशा पानी में भिगोकर खाएं. इससे इनकी गर्मी निकल जाती है. इन्हें सुबह के वक्त खाया जाए तो शरीर को ऊर्जा मिलती है और पाचन सही रहता है. अगर तिल रात को खाए जाएं तो इसमें मौजूद ट्रिप्टोफेन अच्छी नींद लाता है. यानी इसे किसी भी समय खाना फायदेमंद ही है.
साबुन और परफ्यूम बनाने में होता इस्तेमाल
बेबीलोन की सभ्यता में तिल से वाइन बनाई जाती थी. तेल होने की वजह से इससे साबुन और परफ्यूम भी बनाए जाते थे. मेसोपोटामिया के अमीर लोग इसे स्किन केयर के लिए भी इस्तेमाल करते थे. आज भी तिल से साबुन, स्किन केयर प्रोडक्ट और परफ्यूम बनते हैं.
इन लोगों को नहीं खाने चाहिए तिल
जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव है या त्वचा से जुड़ा कोई रोग है तो उन्हें तिल नहीं खाने चाहिए. तिल से एलर्जी बढ़ सकती है. अगर डायरिया हो तो तब भी इसे खाने से परहेज करना चाहिए. तिल में फैट ज्यादा होता है इसलिए जो लोग वजन कम कर रहे हैं, उन्हें इसे नहीं खाना चाहिए. प्रेग्नेंसी के पहले 3 महीनों में भी तिल नहीं खाने चाहिए. जिन लोगों का ब्लड प्रेशर लो रहता है, उन्हें भी इससे दूर रहने की सलाह दी जाती है.
Delhi,Delhi,Delhi
January 14, 2025, 17:53 IST
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