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न फूड कलर, न दिखावा… घर में तैयार मसाले से बनती है बाबा चाट कॉर्नर की फेमस चाट – Chhattisgarh News

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Raipur News: छत्तीसगढ़ के बालोद शहर स्थित बुधवारी बाजार में लगने वाला बाबा चाट कॉर्नर केवल एक चाट की दुकान नहीं, बल्कि स्वाद, भरोसे और परंपरा का ऐसा ठिकाना है, जो बीते चार दशकों से लोगों की जुबान पर कायम है. यहां आने वाले ग्राहक सिर्फ चाट खाने नहीं आते, बल्कि पुराने दिनों के उसी स्वाद को महसूस करने आते हैं, जो वर्षों पहले बाबा चाट कॉर्नर की पहचान बना था.

हर आइटम है लजीज 

बुधवारी बाजार में लोकल18 से बातचीत के दौरान मोहन कल्यानी बताते हैं कि वे पिछले करीब 30 वर्षों से बाबा चाट कॉर्नर पर चाट खाने आ रहे हैं. उनके मुताबिक, 30 साल पहले जो स्वाद यहां के मौजूदा संचालक के पिता के हाथों का था, वही स्वाद आज भी मिलता है. बाबा की चाट ऐतिहासिक है और आज भी नंबर वन है. उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि पहले वे यहां चाट ज्यादा खाते थे, लेकिन अब गुपचुप ज्यादा पसंद करते हैं. मोहन कल्यानी के अनुसार, समोसा चाट, कचौड़ी चाट, खस्ता चाट समेत यहां का हर आइटम अपने आप में खास और लाजवाब है.

40 साल पुराना स्वाद 

बाबा चाट कॉर्नर के संचालक योगेश्वर नाथ योगी बताते हैं कि यह चाट सेंटर करीब 40 साल पुराना है. इसकी शुरुआत उनके पिता ने की थी. शुरुआती दिनों में दुकान पर केवल गुपचुप और साधारण चाट ही परोसी जाती थी, लेकिन लोगों के बढ़ते भरोसे और पसंद के साथ मेन्यू भी बढ़ता चला गया. आज बाबा चाट कॉर्नर पर गुपचुप, चाट, समोसा चाट, कचौड़ी चाट, खस्ता चाट, दही कचौड़ी और खस्ता मसाला जैसे कई विकल्प ग्राहकों को मिलते हैं.

योगेश्वर नाथ योगी का कहना है कि वे बाजार से कम दाम में अच्छी क्वालिटी का नाश्ता लोगों को परोसने का प्रयास करते हैं. यहां सादा समोसा मात्र 10 रुपये नग में मिलता है, जबकि समोसा चाट और कचौड़ी चाट 20 रुपये प्लेट में उपलब्ध है. कम कीमत और भरपूर स्वाद ही बाबा चाट कॉर्नर की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है.

स्वाद के राज पर बात करते हुए योगेश्वर नाथ योगी बताते हैं कि उनके पिता ने घर पर ही एक खास सीक्रेट मसाला बनाना सिखाया था, जिसे आज भी उसी तरीके से तैयार किया जाता है. इसी मसाले की वजह से यहां की चाट का स्वाद अलग और यादगार बना हुआ है. खास बात यह है कि यहां किसी भी प्रकार के फूड कलर का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे स्वाद के साथ-साथ शुद्धता भी बनी रहती है.

आर्थिक पक्ष की बात करें तो बाबा चाट कॉर्नर स्थानीय स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता का भी उदाहरण है. योगेश्वर नाथ योगी बताते हैं कि सामान्य दिनों में रोजाना करीब 250 प्लेट चाट, 200 प्लेट समोसा, 100 प्लेट कचौड़ी और लगभग 2000 नग गुपचुप की बिक्री हो जाती है. इससे प्रतिदिन 5000 रुपये से अधिक की आमदनी होती है. वहीं बुधवारी बाजार के दिन ग्राहकों की भीड़ और बिक्री बढ़ जाती है, जिससे रोजाना की इनकम 8000 रुपये तक पहुंच जाती है.


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/recipe-40-year-old-secret-masala-baba-chaat-balod-local18-ws-l-9968889.html

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