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Khandwa Famous Sweet: मध्य प्रदेश के खंडवा में इन दिनों एक मिठाई का खूब क्रेज है. यह मिठाई सिर्फ होली पर बनती है और इसकी रेसिपी पाकिस्तान से आई थी. बीते 78 साल से इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है.
यह जलेबी नहीं गिहर है जोकि सिंधी डीस है जिसको सभी लोग खाते है
हाइलाइट्स
- खंडवा में होली पर सिंधी मिठाई का क्रेज बढ़ता जा रहा है
- पाकिस्तान से आई रेसिपी से बनी यह मिठाई 78 साल से लोकप्रिय
- सिंधी घियर मिठाई की कीमत 220 रुपये किलो है
खंडवा: भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय सरहद के उस पार से मध्य प्रदेश के खंडवा तक मिठाई की एक रेसिपी पहुंची. वही मिठाई आज 78 साल बाद भी लोगों को आकर्षित कर रही है. रंगपंचमी के अवसर पर इस मिठाई क्रेज कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है. यहां हर घर में यह पहुंचती है. इसका नाम सिंधी घियर मिठाई है, जो सिंधी समाज के लोगों की पसंदीदा है.
भारत-पाक में कितनी भी तल्खी क्यों न हो, लेकिन सिंध नदी के पार से आई एक मिठाई यहां आज भी रिश्तों में मिठास घोल रही है. खंडवा के सिंधी कॉलोनी में होली के सप्ताह भर पहले से क्षेत्र की अलग-अलग दुकानों पर लोग इस मिठाई की खरीदारी करते दिख जाएंगे. इस मिठाई को लोग परिवार की बहन-बेटियों में वितरित करते हैं. यह मिठाई सिर्फ होली के त्योहार पर ही बनाई जाती है.
सिंधी समाज से जुड़े लोगों की परंपरा
सिंधी समाज से जुड़े लोग इस मिठाई को बड़ी तादाद में खरीदते हैं. कई दशकों से इस मिठाई का क्रेज बना हुआ है. इसका स्वाद हर साल नए-नए लोगों को अपने से जोड़ता आ रहा है. सिंधी समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी अब इस मिठाई की खुशबू और स्वाद के दीवाने हो रहे हैं. लिहाजा, दूसरे समाज के लोग भी इसे पसंद करने लगे हैं.
यहां मिठाई का खास ठिकाना
खंडवा में लोकप्रिय सिंधी बाजार में घियर मिठाई को क्विंटल में खरीदने वाले शहर के बड़े व्यापारी अनिल आरतानी ने बताया कि पाकिस्तान के बंटवारे के समय सिंधी समाज के लोग जब पाकिस्तान से भारत आए थे, तब सिंधी घियर भी उनके साथ भारत आ गई. परंपराएं, मान्यताएं बनीं-बिगड़ीं, लेकिन होली पर इस मिठाई का महत्व कई दशकों बाद आज भी बना हुआ है. पाकिस्तान से भारत आए सिंधी परिवार ने इसका निर्वहन बखूबी किया है.
हर रोज कई क्विंटल खपत
खंडवा के सिंधी बाजार में हर रोज कई क्विंटल घियर की खपत इन दिनों हो रही है. जिसे बनाने के लिए अलग-अलग कारीगर अलग-अलग दुकानों पर सेवाएं दे रहे हैं. खंडवा के हीरा स्वीट्स पर 40 साल से नरेश दुलानी ये मिठाई बेचते आ रहे हैं. उनका कहना है कि लोगों की जुबान पर हमेशा इस मिठाई ने मिठास घोली है.
ऐसे बनती है ये मिठाई
कारीगरों ने बताया कि जलेबी की तरह दिखने वाली इस मिठाई को तैयार करने के लिए मैदा, दूध और केसर का घोल बनाकर दो दिनों तक खटास आने तक रखा जाता है. दो दिन बाद शुद्ध घी में इसे छाना जाता है. हर दुकानदार द्वारा बनाने के तरीके अलग-अलग हैं, लेकिन स्वाद सब में एक ही है.
8 दिन तक मिठाई खराब नहीं होती
कारीगरों का दावा है कि यह मिठाई करीब आठ दिनों तक खाई जा सकती है. यह खराब नहीं होगी. वहीं, इसकी कीमत 220 रुपये किलो है.
Khandwa,Madhya Pradesh
March 16, 2025, 08:53 IST
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