करौली. सर्दियों की दस्तक के साथ ही करौली में गजक बनाने का काम भी जोर पकड़ रहा है. यहां के स्थानीय कारीगर सर्दियों के इस खास मिठाई को तैयार करने के लिए दिन-रात मेहनत करते नजर आ रहे हैं. ठंड के शुरू होते ही करौली में गजक की मांग बढ़ जाती है. यहां गजक बनाने का कारोबार 100 वर्षों से भी पुराना बताया जाता है.
बढ़ता जा रहा है गजक का कारोबार
करौली के कारीगरों द्वारा बनाई जाने वाली खास कुटेमा गजक की मांग सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक रहती है. इस गजक की सबसे खास बात यह है कि यह मुंह में रखते ही घुल जाती है. जैसे-जैसे सर्दी तेज हो रही है, करौली के बाजारों में गजक का कारोबार भी बढ़ता जा रहा है.
लोगों को बेसब्री से रहता है इंतज़ार
सर्दी के मौसम में करौली में बनने वाला यह ऐसी खास मिठाई है, जिसका स्वाद लेने के लिए लोग बेसब्री से इस मौसम का इंतजार करते हैं. यहां के स्वाद के दीवाने खासतौर से देर रात तक शहर के बाजरों में इस गजक के स्वाद का आनंद उठाने पहुंचते हैं. करौली में बनने वाली है कुटेमा गजक ऐसी है जो सर्दी के मौसम को और भी यादगार बनाती है.
ठंडी में बढ़ जाती है गजक की मांग
ठंड का मौसम आते ही करौली में गजक की मांग तेजी से बढ़ जाती है, यहीं वजह कि इन दिनों करौली में गजक कारीगरों का कारोबार भी जोरों पर है. गजक बनाने वाले पुश्तैनी कारीगर जब्बार भाई बताते हैं कि यह मिठाई तिल और गुड़ से तैयार होती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले चीनी और गुड़ की चासनी बनाई जाती है, जिसे ठंडा करके खींचा जाता है.खिंचाई से चासनी खस्ता बनती है.इसके बाद इसे तिल के साथ हल्की आंच पर सेंका जाता है.
कुटाई पर निर्भर है गजक का स्वाद
जब्बार भाई के अनुसार, गजक का असली स्वाद इसकी कुटाई पर निर्भर करता है. लकड़ी की हथौड़ी से घंटों कुटाई के बाद तिल फूट जाते हैं और गजक खस्ता और मुलायम बनती है. कुटाई सही तरीके से न हो तो गजक कड़ी और बेस्वाद हो सकती है.
गर्म चासनी से गजक को खतरा
करौली के स्थानीय कारीगरों के मुताबिक, गजक बनाते समय सावधानी जरूरी है. गर्म चासनी के कारण गजक के जलने का खतरा रहता है. ठंड के इस मौसम में गजक की बढ़ी हुई मांग कारीगरों को दिन-रात काम करने पर मजबूर कर रही है, जिससे यह पारंपरिक मिठाई सर्दियों में सबसे लोकप्रिय बनी हुई है.
FIRST PUBLISHED : December 5, 2024, 19:07 IST
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