Last Updated:
लोग सुखी सब्जी जैसे बेरिया, बथुआ साग का और अलग-अलग पालक साग, बादाम का साग बहुत सारे सागों को खाते हैं, जिससे बे-मौसम स्वाद लिया जाता है. इसे बनाने के लिए खेत से सागों को तोड़कर उसे धोकर पहले सुखाते हैं.
बिरिया का स्वाद
हाइलाइट्स
- साग से बनी बिरिया का स्वाद बेमौसम भी ले सकते हैं.
- मिथिला में साग से बिरिया बनाना बहुत प्रसिद्ध है.
- साग को सुखाकर सालभर स्टोर कर सकते हैं.
मधुबनी:- देसी खाने को पसंद करने वाले लोग अक्सर साग पसंद करते हैं. इस मौसम में विभिन्न प्रकार के साग होते हैं और घर की दादी नानी को अक्सर आप छत पर साग से बिरिया बनाते देखते होंगे, जो खाने में बेहद शानदार होता है और बे-मौसम साग का स्वाद भी ले सकते हैं. मिथिलांचल का खानपान जग जाहिर है. यहां पर खाने-पीने के लोग बहुत ज्यादा शौकीन हैं. कोई पर्व त्यौहार हो या वैसे दिन हो, यहां पर भोजन में कई प्रकार की चीज बनाई जाती है. साथ ही 56 भोग यहां का बहुत ही प्रसिद्ध है.
इसके अलावा लोग सुखी सब्जी जैसे बेरिया, बथुआ साग का और अलग-अलग पालक साग, बादाम का साग बहुत सारे सागों को खाते हैं, जिससे बे-मौसम स्वाद लिया जाता है. इसे बनाने के लिए खेत से सागों को तोड़कर उसे धोकर पहले सुखाते हैं, उसके बाद फिर इसे अलग करके और छोटा-छोटा सा एक आकार देकर बेसन में डालकर बनाते हैं. सुखाकर बारिश, गर्मी मौसम जैसे जब साग का मौसम नहीं होता है, तब खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं.
सालभर कर सकते हैं स्टोर
ये खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है और इसे आप सालभर तक धूप लगाकर रख सकते हैं. जब-जब आपका मन करे, तब खा सकते हैं. खासकर मिथिला के लोग जब बारिश का मौसम होता है, तब इसे अधिक उपयोग करते हैं. जैसे सुखोती, बीरिया ,अदोरी ,धनोरी यह सारी चीज खाते हैं, क्योंकि बारिश के मौसम में सब्जी की कीमत भी बहुत अधिक हो जाती है.
बारिश होने से सब्जी गल जाती है और खराब होने लगते हैं. उस समय बाहर न जाए, तो इस सब्जी को घर में बनाकर उसका आनंद लेते हैं. ये बहुत ही प्रसिद्ध है. इसके अलावा इसे बाहर भी भेजा जाता है. आज के समय में मैथिली देश-विदेश में रहते हैं. वह भी यहां से लेकर जाते हैं और हर मौसम में इसका स्वाद लेते हैं.
काम निपटाने के बाद बनाती हैं स्पेशल डिश
दरअसल आजकल आप अगर मिथिला के किसी आंगन में घूमेंगे, तो आपको हर घर में महिलाएं दादी-नानी यह बनाते हुए दिख जाएंगी. यह ठंडे मौसम में खत्म होने लगता है. बसंत ऋतु के बाद और पश्चिम की दिशा में हवा बहते हैं, जिसे मिथिलांचल में हम पाछवा हवा कहते हैं, उस समय ये बनाया जाता है. अपने घर के काम निपटाने के बाद महिलाएं बैठकर इसे बनाती हैं और बातचीत करती हैं, लोकगीत गाते हुए काम करती हैं.
Madhubani,Bihar
March 18, 2025, 14:12 IST
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
https://hindi.news18.com/news/lifestyle/recipe-unseasonal-taste-of-this-sag-by-mithilanchal-special-recipe-store-a-year-unique-taste-local18-9109710.html
