रामपुर: लॉकडाउन ने दुनिया भर के लोगों की जिंदगी को पलटकर रख दिया था, लेकिन कई लोग इस संकट को अवसर में बदलने में सफल हुए. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है 60 वर्षीय कमलजीत की, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद रामपुर में एक छोटी सी दुकान शुरू की और अब उनका नाम शहर के कोने-कोने में है. कमलजीत पहले अपने घर पर ही सरसों का साग और मक्के की रोटी बनाती थीं, लेकिन लॉकडाउन के कारण उनका ऑस्ट्रेलिया लौटने का सपना टूट गया.
उठाया मौके का फायदा
इस दौरान उन्होंने अपने हुनर को एक नए स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया. उन्होंने रोड पर एक छोटी सी दुकान खोली, जहां वह अपने हाथों का स्वाद हर किसी तक पहुंचाती हैं. आज उनकी दुकान पर हर रोज सैकड़ों लोग आते हैं, सिर्फ मक्के की रोटी और सरसों का साग खाने के लिए. कमलजीत की फुल प्लेट की कीमत 160 रुपये है, जिसमें चार ताजि रोटियां, मक्खन, सरसों का साग, चटनी, सलाद, अचार और मिक्स रायता शामिल होता है. वे बताती हैं कि एक दिन में 100 रोटियां बिक जाती हैं.
क्या है दुकान का टाइम
कमलजीत अपनी दुकान सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक वीपी कॉलोनी गुरुद्वारे के पास लगाती हैं और फिर शौकत अली रोड पर रात साढ़े ग्यारह बजे तक अपने स्वाद से लोगों का पेट और मन भरती हैं. उनकी दुकान का नाम अब रामपुर में हर जुबान पर है और लोग दूर-दराज से यहां खाने के लिए आते हैं. कमलजीत ने अपने साग में चने का साग, बथुआ और मेथी मिलाकर उसे और भी स्वादिष्ट बना दिया है.
ऐसे बनता है मजेदार खाना
मक्के की रोटी में हल्का नमक और मेथी डालकर वह एक खास स्वाद देती हैं. वे बताती हैं कि इस काम में उन्हें सुबह से शाम तक का समय लग जाता है, लेकिन उनके हाथों का स्वाद और स्नेह ही उनके खाने को खास बनाता है. कमलजीत की कहानी यह साबित करती है कि अगर दिल में लगन हो और मेहनत करने का जुनून हो, तो कोई भी काम छोटा नहीं होता. उन्होंने न केवल लॉकडाउन में अपने हुनर को पहचानने का अवसर पाया, बल्कि अब वे रामपुर के हर घर तक अपने स्वाद का संदेश पहुंचाती हैं.
FIRST PUBLISHED : December 4, 2024, 14:51 IST
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