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अगर आपके घर में हो रही सीलन, तो हो जाएं सावधान, हो सकती है यह खतरनाक बीमारी, एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

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अलीगढ़. अक्सर घरों की दीवारों पर दिखाई देने वाली सीलन और नमी को लोग केवल मकान की खराबी समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन यह समस्या सिर्फ फर्नीचर या दीवारों तक सीमित नहीं रहती. घर के भीतर बनी रहने वाली नमी इंसान की सेहत पर भी गहरा और खतरनाक असर डाल सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक सीलन की वजह से फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण पनपता है, जो सांस से जुड़ी बीमारियों, एलर्जी और त्वचा रोगों का कारण बन सकता है. ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि घरों में सीलन क्यों होती है, इससे क्या नुकसान होते हैं और इससे बचाव के क्या उपाय अपनाए जाने चाहिए.

जानकारी देते हुए एएमयू के भूगोल विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर सालेहा जमाल ने बताया कि अक्सर कई घरों में दीवारों पर सीलन और नमी की समस्या देखने को मिलती है. इसकी वजह से न सिर्फ घर का फर्नीचर और अन्य सामान खराब होता है, बल्कि यह समस्या इंसान की सेहत पर भी गंभीर प्रभाव डालती है. घरों में नमी के पीछे कई कारण होते हैं, जिनमें पर्यावरणीय कारण सबसे प्रमुख हैं. अगर घर नमी वाले क्लाइमेट में स्थित है, जहां बारिश अधिक होती है या जो समुद्र के तटीय इलाके के पास है, तो वहां वातावरण में मॉइश्चर लेवल अधिक होने के कारण सीलन की समस्या आम हो जाती है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा घरों के अंदर दीवारों और फर्श पर नमी आने की एक बड़ी वजह अंडरग्राउंड वाटर होती है. कैपिलरी एक्शन के कारण जमीन के नीचे की नमी धीरे-धीरे दीवारों में ट्रांसफर होकर ऊपर तक पहुंच जाती है. पुरानी इमारतों में यह समस्या और भी ज्यादा देखने को मिलती है. लगभग 20–25 साल पुरानी बिल्डिंग में सीमेंट और ईंटों की बाइंडिंग कमजोर हो जाती है, जिससे वे नमी को ज्यादा अब्जॉर्ब करने लगती हैं. कई बार अंडरग्राउंड पाइप लाइनों में लीकेज भी नमी भी बड़ी वजह बनती है, खासकर बाथरूम और किचन एरिया में यह समस्या ज्यादा आम होती है. सीलन का असर सिर्फ घर के सामान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह सेहत के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.

प्रोफेसर ने कहा कि नमी के कारण दीवारों पर फंगल ग्रोथ यानी मोल्ड बनने लगता है, साथ ही बैक्टीरिया और सूक्ष्म कीटाणु भी पनपने लगते हैं. इसका सीधा असर इंसान के रेस्पिरेटरी सिस्टम पर पड़ता है. दमा (अस्थमा) और सीओपीडी जैसे मरीजों के लिए यह स्थिति काफी नुकसानदायक हो सकती है. नवजात शिशुओं और बुजुर्गों पर भी नमी का प्रभाव ज्यादा गंभीर होता है. इसके अलावा सीलन की वजह से एलर्जी की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं, जैसे बार-बार छींक आना, खांसी, सांस लेते समय घरघराहट, चक्कर आना और शरीर में असहजता महसूस होना.

उन्होंने बताया कि लंबे समय तक नमी वाले वातावरण में रहने से त्वचा से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती हैं, क्योंकि फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. नमी और सीलन से बचाव के लिए कुछ जरूरी उपाय अपनाए जा सकते हैं. घर बनवाते समय डैम्प प्रूफ कोर्स (DPC) का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी होता है, जिससे नमी एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर न हो. आजकल कई आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं, जिनसे सीलन की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है. पुरानी इमारतों में समय-समय पर मरम्मत और रेनोवेशन कराना चाहिए. इसके अलावा अगर अंडरग्राउंड पाइप लाइनों में कहीं भी लीकेज हो, तो उसे तुरंत ठीक कराना जरूरी है, ताकि नमी आगे फैल न सके. इन उपायों को अपनाकर घरों में सीलन से होने वाले नुकसान और सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है.


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-aligarh-damp-walls-health-risks-causes-prevention-experts-warning-seelan-ke-nuksan-local18-10128596.html

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